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खेल दिवस: मीर रंजन नेगी ने कहा- आज भी सपने में होती है हॉकी से जंग, भारतीय कोच बेहतर; दी कई जानकारी

Sat, 29 Aug 2026 01:30 PM IST
Aman Vishwakarma नीलांबुज तिवारी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
नीलांबुज तिवारी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 29 Aug 2026 01:30 PM IST
सार

पूर्व भारतीय हॉकी गोलकीपर मीर रंजन नेगी ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को हॉकी सीखने के लिए यूरोप जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने विदेशी कोच की जगह भारतीय हॉकी कोच को बेहतर बताया। नेगी ने कहा कि हॉकी उनके जीवन का अहम हिस्सा रही है और आज भी सपने में हॉकी से जंग होती है। उन्होंने भारतीय शैली और प्रतिभा पर भरोसा जताया।

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Sports Day Mir Ranjan Negi says still battles with hockey dreams Indian coaches better shares insights
राष्ट्रीय खेल दिवस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज भी सपने में हॉकी की जंग ही चलती है। आज भी सपने में टीम को प्रशिक्षण देते और भारत को पाकिस्तान के खिलाफ जीतते हुए देखता हूं। उक्त बातें एक कार्यक्रम में बीएचयू आए चक दे इंडिया फेम और भारतीय टीम के पूर्व कोच मीर रंजन नेगी ने बातचीत के दौरान कहीं। बताया कि भारतीय खिलाड़ियों को यूरोप से हॉकी सीखने की जरूरत नहीं है।

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विदेशी कोच के बजाय भारतीय हॉकी कोच बेहतर परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज भी हर जगह टर्फ नहीं है। खिलाड़ी की शुरुआत आज भी ग्रासी मैदान से होती है। ग्रास और टर्फ हॉकी में अंतर है। जब खिलाड़ी ग्रासी मैदान से हॉकी सीखकर निकलता है तो उसे टर्फ पर गेंद और हॉकी के साथ तालमेल बनाने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है। 
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उन्होंने बातचीत के दौरान पूर्व ओलंपियन और अपने साथी मोहम्मद शाहिद को याद किया। उन्होंने कहा कि वाराणसी की हॉकी काफी समृद्ध है। यहां मोहम्मद शाहिद से लेकर ललित उपाध्याय तक हॉकी की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने 1982 में पाकिस्तानी टीम से मिली हार के बाद उन्हें खलनायक बताए जाने पर दुख व्यक्त किया। क
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कहा कि उस मैच में कोच ने बहुत गलतियां की थीं। एक ऐसे खिलाड़ी राजेंद्र सिंह को बतौर डिफेंडर मैदान में उतार दिया, जिसका घुटना खराब था। इसका खामियाजा पाकिस्तान से हार के रूप में पूरी टीम को भुगतना पड़ा। 16 साल बाद 1998 में टीम मिली और भारतीय टीम ने बैंकॉक में आयोजित एशियाई खेल में मेरी कोचिंग में स्वर्ण पदक जीता था। घास पर खेलने, गेंद रोकने और उसे लेकर बढ़ने का तरीका अलग है, जबकि टर्फ पर खेल बहुत तेज हो जाता है। टर्फ पर कलात्मक हॉकी नहीं खेल सकते। आज भारतीय हॉकी यूरोपीय हॉकी हो गई है। मीर रंजन नेगी ने कहा कि सपने देखना बंद नहीं किया है। 

जर्सी का रंग बदलने की जगह प्रदर्शन सुधारें
भारतीय टीम की जर्सी बदलने से संबंधित सवाल पर मीर रंजन नेगी ने कहा कि जर्सी का रंग बदलने से टीम के प्रदर्शन पर असर नहीं पड़ता है। अगर ऐसा होता तो भारत नीदरलैंड के खिलाफ नहीं हारता। कहा कि नीदरलैंड की टीम नीली जर्सी में खेली और भारतीय टीम को हराने में कामयाब हुई। हॉकी प्रशासकों को टीम की जर्सी के बजाय उसके प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए।

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