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नागपंचमी पर टूटेगी परंपरा, अखाड़े में नहीं होंगे दंगल
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वाराणसी। कोरोना महामारी में खेल गतिविधियां स्थगित हैं। ऐसे में प्रतिवर्ष नागपंचमी के दिन प्राचीन अखाड़ों की सैकड़ों साल से दंगल, कुश्ती, गदा, डंबल और मलखम फेरने की प्रतियोगिताएं होती चली आ रही थी। मगर इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते ये परंपराएं भी टूट जाएंगी।
सोनिया अखाड़े के प्रशिक्षक राजेश यादव ने बताया कि ढाई सौ साल से इस अखाड़े में नागपंचमी के दिन दंगल, कुश्ती गदा, डंबल और मलखम की प्रतियोगिताएं होती आ रहीं थीं। मगर इस वर्ष कोरोना महामारी में किसी प्रकार की कोई खेल गतिविधि नहीं होगी।
कज्जाकपुरा स्थित गया सेठ अखाड़े के प्रशिक्षक रोशन यादव ने बताया कि प्रतिवर्ष यहां सैकड़ों बच्चे दंगल और कुश्ती प्रतियोगिता के लिए चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर और जौनपुर के पहलवान आते थे। मगर इस वर्ष मामूली पूजा पाठ करके नागपंचमी की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
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नेशनल पहलवान विकास ने बताया कि नागपंचमी के दिन अक्सर अखाड़े दंगल से गुलजार होते है। हम जैसे पहलवान चार पांच अखाड़ों पर दंगल में जीती हुई प्रतियोगिता के इनाम से अपने महीनों के खुराक चला लेते थे। मगर इस बार कोरोना की वजह से कहीं भी दंगल होने की कोई सूचना नहीं।
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सोनिया अखाड़े के प्रशिक्षक राजेश यादव ने बताया कि ढाई सौ साल से इस अखाड़े में नागपंचमी के दिन दंगल, कुश्ती गदा, डंबल और मलखम की प्रतियोगिताएं होती आ रहीं थीं। मगर इस वर्ष कोरोना महामारी में किसी प्रकार की कोई खेल गतिविधि नहीं होगी।
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कज्जाकपुरा स्थित गया सेठ अखाड़े के प्रशिक्षक रोशन यादव ने बताया कि प्रतिवर्ष यहां सैकड़ों बच्चे दंगल और कुश्ती प्रतियोगिता के लिए चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर और जौनपुर के पहलवान आते थे। मगर इस वर्ष मामूली पूजा पाठ करके नागपंचमी की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
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नेशनल पहलवान विकास ने बताया कि नागपंचमी के दिन अक्सर अखाड़े दंगल से गुलजार होते है। हम जैसे पहलवान चार पांच अखाड़ों पर दंगल में जीती हुई प्रतियोगिता के इनाम से अपने महीनों के खुराक चला लेते थे। मगर इस बार कोरोना की वजह से कहीं भी दंगल होने की कोई सूचना नहीं।