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अध्यात्म हमारे जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता : विज्ञान देव
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Spirituality is an indispensable requirement of our life: Vigyan Dev
चौबेपुर। अध्यात्म हमारे जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इससे हमारे जीवन का संपूर्ण विकास होता है। यह बातें बृहस्पतिवार को विहंगम योग के संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने स्वर्वेद महामंदिर धाम पर आयोजित सदगुरु आचार्य जन्मोत्सव समारोह पर कहीं।
उन्होंने कहा कि भारत आध्यात्मिक देश रहा है। अध्यात्म से ही हमारी पहचान संपूर्ण विश्व में है। इसी आध्यात्मिक ज्ञान की धारा को विहंगम योग के प्रणेता सदगुरु सदाफल देव भगवान ने अपनी आत्मा में धारण किया और संपूर्ण विश्व की मानवता के कल्याण के लिए उसे स्वर्वेद में अभिव्यक्त कर दिया। आध्यात्मिक जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है। विहंगम योग विशुद्ध आध्यात्मिक मार्ग है।
सद्गुरु स्वतंत्र देव महाराज ने अपनी दिव्यवाणी में कहा कि मानव जीवन को सदाचार, सुद्धाचार, सत्य, नैतिकता एवं परोपकारमय बनाने की आवश्यकता है। विवेक, धैर्य, क्षमा एवं शांति को मानव का आभूषण बताते हुए उसको व्यवहारिक जीवन में प्रयोग करने का निर्देश दिया। इससे पूर्व श्वेत ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके बाद विश्वशांति वैदिक महायज्ञ में उपस्थित हजारों अनुयायी शामिल हुए। विहंगम योग के क्रियात्मक ज्ञान की दीक्षा भी दी गई। साथ कुशल चिकित्सकों के निर्देशन में रोगियों को चिकित्सा परामर्श भी दिया गया। संस्थान के द्वारा ‘अमृत धारा’ नामक दिव्य स्मारिका का विमोचन किया गया। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने आध्यात्मिक भजन प्रस्तुत किए।
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उन्होंने कहा कि भारत आध्यात्मिक देश रहा है। अध्यात्म से ही हमारी पहचान संपूर्ण विश्व में है। इसी आध्यात्मिक ज्ञान की धारा को विहंगम योग के प्रणेता सदगुरु सदाफल देव भगवान ने अपनी आत्मा में धारण किया और संपूर्ण विश्व की मानवता के कल्याण के लिए उसे स्वर्वेद में अभिव्यक्त कर दिया। आध्यात्मिक जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है। विहंगम योग विशुद्ध आध्यात्मिक मार्ग है।
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सद्गुरु स्वतंत्र देव महाराज ने अपनी दिव्यवाणी में कहा कि मानव जीवन को सदाचार, सुद्धाचार, सत्य, नैतिकता एवं परोपकारमय बनाने की आवश्यकता है। विवेक, धैर्य, क्षमा एवं शांति को मानव का आभूषण बताते हुए उसको व्यवहारिक जीवन में प्रयोग करने का निर्देश दिया। इससे पूर्व श्वेत ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके बाद विश्वशांति वैदिक महायज्ञ में उपस्थित हजारों अनुयायी शामिल हुए। विहंगम योग के क्रियात्मक ज्ञान की दीक्षा भी दी गई। साथ कुशल चिकित्सकों के निर्देशन में रोगियों को चिकित्सा परामर्श भी दिया गया। संस्थान के द्वारा ‘अमृत धारा’ नामक दिव्य स्मारिका का विमोचन किया गया। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने आध्यात्मिक भजन प्रस्तुत किए।
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