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खर्च में ‘पसंद’ के दिन लदे
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 18 Nov 2016 02:21 AM IST
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पहड़िया मंडी में खरीदारों की आमद कम होने से खाली बैठे आढ़ती।
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500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडी पहड़िया में फल और सब्जी की आवक न के बराबर रह गई है। फल और सब्जियों के दाम में भी गिरावट आई है। मंडी में जहां सेब के 10-12 ट्रक, अनार के 4-5 ट्रक, मुसब्ब के8-10 ट्रक, केले के 13-15 ट्रक प्रतिदिन आते थे, वे अब घट गए हैं। अनार जहां 1000 रुपये पेटी बिक रहा था, जो 600-700 रुपये पर पहुंच गया है। यही हाल सेब का है। प्रति पेटी सेब 600-700 से घटकर 400-500 रुपये पहुंच गया है।
उधर, आलू, प्याज और टमाटर की आवक ठप जैसी हो गई है और जो है भी उनमें सड़न पैदा हो रही है। जो है, उसे भी लोग खरीदने नहीं आ रहे हैं। आढ़ती राम जनम यादव की मानें को मंडी में आलू की खपत जहां 20 से 25 ट्रक प्रतिदिन देती थी वह अब घटकर चार-पांच रह गई है। किसानों का नुकसान हो रहा है। आढ़ती डॉ. मीतेंद्र यादव बताते हैं कि मिर्च और टमाटर खेत में तैयार हैं पर खरीदार नहीं दिख रहे। इसकी वजह से किसान परेशान हैं। वाराणसी प्रगतिशील फल सब्जी व्यवसायी समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार सोनकर कारण बताते हैं-नोटबंदी के फैसले के बाद लोगों के पास बड़ी जरूरतों पर खर्च करने के बाद पैसे ही नहीं बचे हैं।
पूर्वांचल की सबसे बड़ी किराना मंडी विशेश्वरगंज में जहां एक तरफ सन्नाटा पसरा है तो वहीं दूसरी ओर दाम में तेजी दर्ज की जा रही है।बाहर से आवक न होने के कारण चीनी के थोक व्यापारी उपलब्ध माल को 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर बेच रहे हैं। अच्छी क्वालिटी की चीनी जो 4000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी वह इस समय 4200 रुपये से ऊपर बिक रही है। पुरानी चीनी का भाव भी आसमान पर है। चीनी के थोक विक्रेता राजेश गुप्ता ने बताया कि आवक न होने की वजह से दाम में तेजी आई है। इस बीच अन्य राज्यों से आने वाले मसालों की आवक घट गई है तो वहीं बाजार में उपलब्ध मसालों के भाव बढ़ रहे हैं। जीरा 180 से 210 रुपये पहुंच गया है। हल्दी, मिर्च, धनिया आदि मसालों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। काजू के दाम में प्रति किलो 400 रुपये का उछाल आया है। लौंग, इलाइची, जायफर, बादाम गिरी का दाम भी बढ़ गया है। विशेश्वरगंज भैरवनाथ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक कसेरा का कहना है कि आवक न बढ़ी तो मसालों के दाम में और तेजी आ सकती है।
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सोन के दाम बृहस्पतिवार को 30800 रुपये प्रति 10 ग्राम रहे। जहां तक शादियों में आभूषणों की खरीदारी की बात है तो वह या तो उधारी पर हो रही है या आपसी मदद से की जा रही है। हालांकि उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ जिला महामंत्री किशोर सेठ ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा शादी-ब्याह के लिए ढाई लाख रुपया देने की घोषणा प्रभावी होने के बाद जब लोगों को पैसा मिलेगा तो बाजार में तेजी आएगी। कपड़ों और रेडीमेड गारमेंट की दूकानों पर पहुंचने वाले लोग हाथ दबाकर खर्च कर रहे हैं। फुटकर के संकट के कारण लोग ऑनलाइन शॉपिंग ज्यादा कर रहे हैं। वस्त्र उद्योग से अरुण खन्ना ने बताया कि मार्केट में पुराने नोट नहीं लिए जाने से यह स्थिति बन गई है।
बाजार के जानकारों को आशंका है कि नोटबंदी के बाद तमाम बड़े कारोबारियों ने बाहर से आने वाली तमाम वस्तुओं का अवैध भंडारण कर लिया है। बाजार में खरीदारी कम जरूर है लेकिन कारोबारी आने वाले दिनों की सोचते हैं। नमक के कत्रिम संकट का हवाला देते हुए कहते हैं कि अगर कारोबारियों पर निगाह नहीं रखी गई तो कारोबारी खाद्यान्न सामग्री का बनावटी संकट पैदा कर सकते हैं। जैसे ही इसका प्रचार हो जाएगा, चोरी-छिपे ऊंचे दाम पर इसकी बिक्री की जाएगी।
ग्राहकों की कमी के कारण दूध मंडियों में दूध का भाव गिर गया है। गुरुवार को दूध सट्टी में 35 से 40 रुपये प्रति लीटर बिका, जबकि शादी-विवाह का मुहूर्त शुरू होने के बाद दूध का भाव आसमान छूने लगता था। पांडेयपुर दूध सट्टी में मोहाव से दूध बेचने आए राम विलास का कहना था कि पिछले साल लगन में दूध 80 से 100 रुपये तक बिका था।
बताया कि बुधवार को शादी का दिन होने के बाद भी अधिकतम 70 रुपये लीटर ही दूध बिका। विशेश्वरगंज दूध सट्टी में चौबेपुर से दूध बेचने आए पारस का कहना था कि शादी-विवाह के सीजन में दूध के लिए मारामारी होती थी लेकिन इस बार नोट ने पूरा बाजार का खेल ही बिगाड़ दिया है। मिठाइयों का धंधा भी मंदा हो गया है। पांडेयपुर स्थित मिष्ठान्न भंडार के संचालक मंजीत सिंह ने बताया कि नोट बंद होने से मिठाइयों की खपत काफी कम हो गई है।
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उधर, आलू, प्याज और टमाटर की आवक ठप जैसी हो गई है और जो है भी उनमें सड़न पैदा हो रही है। जो है, उसे भी लोग खरीदने नहीं आ रहे हैं। आढ़ती राम जनम यादव की मानें को मंडी में आलू की खपत जहां 20 से 25 ट्रक प्रतिदिन देती थी वह अब घटकर चार-पांच रह गई है। किसानों का नुकसान हो रहा है। आढ़ती डॉ. मीतेंद्र यादव बताते हैं कि मिर्च और टमाटर खेत में तैयार हैं पर खरीदार नहीं दिख रहे। इसकी वजह से किसान परेशान हैं। वाराणसी प्रगतिशील फल सब्जी व्यवसायी समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार सोनकर कारण बताते हैं-नोटबंदी के फैसले के बाद लोगों के पास बड़ी जरूरतों पर खर्च करने के बाद पैसे ही नहीं बचे हैं।
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पूर्वांचल की सबसे बड़ी किराना मंडी विशेश्वरगंज में जहां एक तरफ सन्नाटा पसरा है तो वहीं दूसरी ओर दाम में तेजी दर्ज की जा रही है।बाहर से आवक न होने के कारण चीनी के थोक व्यापारी उपलब्ध माल को 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर बेच रहे हैं। अच्छी क्वालिटी की चीनी जो 4000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी वह इस समय 4200 रुपये से ऊपर बिक रही है। पुरानी चीनी का भाव भी आसमान पर है। चीनी के थोक विक्रेता राजेश गुप्ता ने बताया कि आवक न होने की वजह से दाम में तेजी आई है। इस बीच अन्य राज्यों से आने वाले मसालों की आवक घट गई है तो वहीं बाजार में उपलब्ध मसालों के भाव बढ़ रहे हैं। जीरा 180 से 210 रुपये पहुंच गया है। हल्दी, मिर्च, धनिया आदि मसालों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। काजू के दाम में प्रति किलो 400 रुपये का उछाल आया है। लौंग, इलाइची, जायफर, बादाम गिरी का दाम भी बढ़ गया है। विशेश्वरगंज भैरवनाथ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक कसेरा का कहना है कि आवक न बढ़ी तो मसालों के दाम में और तेजी आ सकती है।
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सोन के दाम बृहस्पतिवार को 30800 रुपये प्रति 10 ग्राम रहे। जहां तक शादियों में आभूषणों की खरीदारी की बात है तो वह या तो उधारी पर हो रही है या आपसी मदद से की जा रही है। हालांकि उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ जिला महामंत्री किशोर सेठ ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा शादी-ब्याह के लिए ढाई लाख रुपया देने की घोषणा प्रभावी होने के बाद जब लोगों को पैसा मिलेगा तो बाजार में तेजी आएगी। कपड़ों और रेडीमेड गारमेंट की दूकानों पर पहुंचने वाले लोग हाथ दबाकर खर्च कर रहे हैं। फुटकर के संकट के कारण लोग ऑनलाइन शॉपिंग ज्यादा कर रहे हैं। वस्त्र उद्योग से अरुण खन्ना ने बताया कि मार्केट में पुराने नोट नहीं लिए जाने से यह स्थिति बन गई है।
बाजार के जानकारों को आशंका है कि नोटबंदी के बाद तमाम बड़े कारोबारियों ने बाहर से आने वाली तमाम वस्तुओं का अवैध भंडारण कर लिया है। बाजार में खरीदारी कम जरूर है लेकिन कारोबारी आने वाले दिनों की सोचते हैं। नमक के कत्रिम संकट का हवाला देते हुए कहते हैं कि अगर कारोबारियों पर निगाह नहीं रखी गई तो कारोबारी खाद्यान्न सामग्री का बनावटी संकट पैदा कर सकते हैं। जैसे ही इसका प्रचार हो जाएगा, चोरी-छिपे ऊंचे दाम पर इसकी बिक्री की जाएगी।
ग्राहकों की कमी के कारण दूध मंडियों में दूध का भाव गिर गया है। गुरुवार को दूध सट्टी में 35 से 40 रुपये प्रति लीटर बिका, जबकि शादी-विवाह का मुहूर्त शुरू होने के बाद दूध का भाव आसमान छूने लगता था। पांडेयपुर दूध सट्टी में मोहाव से दूध बेचने आए राम विलास का कहना था कि पिछले साल लगन में दूध 80 से 100 रुपये तक बिका था।
बताया कि बुधवार को शादी का दिन होने के बाद भी अधिकतम 70 रुपये लीटर ही दूध बिका। विशेश्वरगंज दूध सट्टी में चौबेपुर से दूध बेचने आए पारस का कहना था कि शादी-विवाह के सीजन में दूध के लिए मारामारी होती थी लेकिन इस बार नोट ने पूरा बाजार का खेल ही बिगाड़ दिया है। मिठाइयों का धंधा भी मंदा हो गया है। पांडेयपुर स्थित मिष्ठान्न भंडार के संचालक मंजीत सिंह ने बताया कि नोट बंद होने से मिठाइयों की खपत काफी कम हो गई है।