नवरात्र पर विशेष: काशी से विदेश तक पहुंचाया सेवा का संस्कार, जानें अनन्या के बारे में
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नवरात्र का पावन पर्व आज से शुरू हो रहा है। नौ दिन तक मां जगदंबा की भक्ति में श्रद्धालु डूबे रहेंगे। इस कड़ी में हमारे समाज में कई ऐसी महिलाएं हैं, जो जरूरतमंदों के साथ कदम से कदम मिलाकर उनका जीवन संवारने की कोशिश में जुटी हैं। इस नवरात्र ऐसी ही शक्तियों को हम आपसे रूबरू कराएंगे। ताकि इनकी कोशिशों से प्रेरणा लेकर समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए।
‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार’ इन पंक्तियों को जिंदगी का सार मनाने वाली कबीर नगर की अन्नया भरतीया मातृ शक्ति प्रचार से दूर रहकर जरूरतमंदों की मदद करती हैं। जरूरतमंद की मदद कर उनका जीवन बचाती हैं, तो कभी बच्चों की मदद कर उनका जीवन संवारती हैं।
अनन्या ने सेवा का संस्कार तो अपनी मां से काशी में सीखा, लेकिन मां के ये संस्कार वह काशी के साथ-साथ विदेशों में भी बांट रही हैं। दुबई में पढ़ाई के दौरान रक्तदान कर दोस्तों या जरूरतमंदों की मदद करना हो या कैंसर पीड़ित बच्चों तक हर संभव मदद पहुंचाना। अनन्या इन सेवा कार्यों के जरिए दूसरों के जीवन में एक नई उम्मीद जगा रही हैं।
अनन्या पॉकेट मनी से पैसे बचाकर दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए भी दान करती हैं। एक महीने पहले अनन्या के दोस्त की मृत्यु कैंसर से हो गई, जिसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वो कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए काम करेंगी। नवरात्र शुरू होने से पहले उन्होंने इस संकल्प की शुरुआत कैंसर पीड़ित के लिए पहली बार प्लेटलेट्स दान करने से की।