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खुद का सब कुछ न्योछावर कर, बच्चों का भविष्य बनाया बेहतर

Mon, 27 Jul 2020 01:33 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2020 01:33 AM IST
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वाराणसी/ राजातालाब। जन्मदाता ही नहीं जीवनदाता भी होते हैं अभिभावक। प्रतिकूलता सह कर भी अनुकूल परिवेश देते हैं अभिभावक। ये चंद पंक्तियां अभिभावकों की बच्चों की प्रति उनकी जिम्मेदारी को प्रदर्शित करती हैं। हालांकि कोई भी रचना माता पिता के संघर्षों को उनके बच्चों के बेहतर भविष्य बनाने के लिए किए गए प्रयत्नों को न समेट सकती हैं न ही व्याख्या कर सकती हैं। फिर भी हमने एक छोटा सा प्रयास किया है। दरअसल, 26 जुलाई को अभिभावक दिवस है। इस मौके पर पर हम कुछ ऐसे माता-पिता से मिले जिन्होंने अपने बच्चों को कामयाब बनाने के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया।
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मजदूरी कर बेटों को बनाया फौजी
राजातालाब क्षेत्र के बहादुरपुर गांव के सुनील यादव और उनके भाई के लिए उनकी मां मंगरा देवी माता और पिता दोनों हैं। मां के संघर्षों को बताते हुए सुनील गर्व से कहते हैं कि मां ने ही हम दोनों को जीवन में कई सीखें दी हैं, जिनकी बदौलत आज हम एक सफल इंसान बन पाए हैं। सुनील जब 16 साल के थे तभी उनके पिता अलगू यादव का देहांत हो गया था। इसके बाद बेटों की पढ़ाई पर संकट आ गया। लेकिन मां ने कठिन समय में घर की कमान संभाली। दोनों बेटों की परवरिश के लिए मां ने घर गृहस्थी के काम करने के साथ ही मजदूरी कर बेटों को पढ़ाया। जिसकी बदौलत आज दोनों भाई देश की सेवा कर रहे हैं। मंगरा देवी का एक बेटा सुनील कश्मीर के बांदीपोरा के गुरेज वैली में तैनात है। वहीं दूसरा बेटा पठानकोट में सेना में हैं।
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दिव्यांग बेटी के लिए पिता ने बनाई डिवाइस
सुमेधा पेराप्लेजिक नाम की बीमारी की शिकार है। 2013 में रीढ़ की हड्डी में इंफेक्शन हुआ और उनकी कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। तब वो 10वीं में पढ़ती थीं। इससे सुमेधा को रोज फिजियोथेरेपी करानी पड़ती थी। सुमेधा के पिता बृजेशचंद पाठक को फिजियोथेरेपिस्ट ने कहा कि कोई ऐसी डिवाइस हो जिसे सुमेधा खुद चला सके। फिर क्या उन्होंने साइकिल की दुकान से उसके पार्ट्स ले आए और डिवाइस तैयार कर दी। इसके बनने के बाद सुमेधा व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे बिना किसी मदद से अपने हाथों से पैरों को मूवमेंट देती हैं। बीमारी की वजह से उनकी इंटर की परीक्षा छूट गई थी जिसे उन्होंने बाद में 91.4 प्रतिशत अंको के साथ दिव्यांग वर्ग में नेशनल टॉपर रहीं। सुमेधा ने शूटिंग भी सीखी और स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप के दिव्यांग वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। प्री नेशनल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लक्ष्मीबाई अवार्ड से भी सम्मानित है।
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