विश्व मृदा दिवस : एक साल में 10 हजार नमूनों की जांच, सुधर रही मिट्टी की खेती, आयरन की है कमी; ऐसे होता है काम
Varanasi News : किसानों के लिए यह अच्छी खबर है कि यहां मिट्टी की सेहत अब अच्छी हो रही है। 10 सालों में बनारस की मिट्टी में विभिन्न तत्वों की कमी थी। क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक के अनुसार, अब इसमें सुधार हो रहा है। कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तो मिट्टी के साथ उनका उत्पादन भी बढ़ेगा।
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जिले की मिट्टी की सेहत सुधर रही है। एक साल में 10 हजार नमूने जांच हुए। रिपोर्ट बताते हैं कि अभी तक जिन तत्वों की कमी थी, उनमें लगातार सुधार हो रही है। इसके चलते रबी, खरीफ व जायद की फसलों में 10 से 15 फीसदी की औसत वृद्धि हुई है। अभी मिट़टी में पोटाश पर्याप्त मात्रा में है। आर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन फास्फोरस के अलावा सूक्ष्म तत्वों की मात्रा बढ़ने से फसलों पर बेहतर प्रभाव पड़ा है। हालांकि आयरन की कमी है।
10 सालों में बनारस की मिट्टी में विभिन्न तत्वों की कमी थी, लेकिन लगातार किसानों के लिए चलाए जा रही सरकारी योजनाओं और जागरूकता से इसमें उतरोत्तर सुधार हुए हैं। क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक मृदा राजेश राय ने बताया कि हर साल ब्लाकवार मिट्टी की जांच किए जाने से किसान जागरूक हुए हैं और मिट्टी में पहले से आवश्यक तत्वों की मात्रा बढ़ाए हैं। नतीजा, अब सुधार दिख रहा है।
इस बार आठों ब्लाक से एक-एक हजार मिट्टी के नमूने का परीक्षण हुआ है। दो हजार से अधिक नमूने एनजीओ व किसान खुद जांच करवाए हैं। सभी के रिपोर्ट में सुधार है। उन्होंने बताया कि आर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन फास्फोरस के अलावा सूक्ष्म तत्वों को लगातार देने की जरूरत है, तभी आगे और सुधार हो सकता है।
5 साल में हो जाएगा सामान्य
जिले की मिट्टी में सुधार को देखते हुए आगे और बेहतर हो सकता है। राजेश राय ने बताया कि पांच साल में मिट्टी की जरूरत के लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे और अतिरिक्त तत्वों की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए किसान रासायनिक उर्वरक के बजाय हरी खाद, वर्मीकंपोस्ट का प्रयोग करें। बताए जा रहे वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तो मिट्टी के साथ उनका उत्पादन भी बढ़ेगा।
फसल चक्र से होगा और बेहतर
किसान खेती में पहले से चली आ रही फसल चक्र की परंपरा को कायम रखते हुए इसको अपनाएं। राजेश राय ने बताया कि फसल चक्र का मतलब साल में दोनों सीजन में बदल कर फसलों की बोआई करें। एक सीजन में छोटी और दूसरे में लंबे जड़ वाली फसलों की बुआई करवाएं। इससे मिट्टी अपने पोषक तत्व को प्राप्त कर लेती है। अगर, तीन सीजन में फसल उगाते हैं तो उसके जरूरी तत्व को दें, तभी मिट्टी की औसत क्षमता कायम रहेगी।
बोले अधिकारी
कृषि विभाग की योजनाएं व किसानों में जागरूकता आने से मिट्टी में सुधार हो रहे हैं। हालांकि जिन तत्वों की कमी है और उसके प्रयोग लगातार करने होंगे, तभी संपूर्ण सुधार की ओर बढ़ सकते हैं। - राजेश राय, सहायक निदेशक मृदा, क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला