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...तो कैसे निबटेंगे संक्रामक बीमारियों से

Fri, 01 Jul 2016 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 01 Jul 2016 02:18 AM IST
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... So how to deal with infectious diseases
खंडहर में तब्दील हो रहे वार्ड।
समय : दोपहर बाद करीब 1.30 बजे। स्थान: कज्जाकपुरा स्थित संक्रामक रोग अस्पताल। यहां न तो कोई चिकित्सक था और न ही कर्मचारी। मुख्य भवन में ताला बंद था। उसके ठीक सामने बरामदे में सात-आठ लोग ‘खेल’ रहे थे तो किनारे एक-दो लोग फर्श पर ही अलसाते-ऊंघते पड़े थे। नगर निगम की ओर से संचालित इस अस्पताल की हालत खुद ही बीमारों जैसी हो गई है। खंडहर से दिखने वाले अस्पताल के मुख्य भवन में चिकित्सक और कर्मचारी तो बैठते हैं पर मरीजों को भर्ती करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसका जीर्णोद्धार कराने के बजाय नगर निगम ने अस्पताल परिसर को कबाड़ गोदाम के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यहां कूड़ा उठाने वाले कंटेनर के साथ ही टूटे-फूटे बेड आदि जैसे-तैसे फेंके पड़े हैं। इनमें कई तो ऐसे हैं जिन्हें देखकर लगता है कि इनका कभी इस्तेमाल ही नहीं हुआ।
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नगर निगम प्रशासनकी उदासीनता का शिकार हो रहे संक्रामक रोग अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या भी न के बराबर है। प्रतिदिन औसतन दो से तीन मरीज ही यहां आते हैं। इनमें भी कुत्ता काटने के बाद परेशान मरीजों की संख्या अधिक रहती है। यहां एक चिकित्साधिकारी और तीन कर्मचारियों की तैनाती है। लोगों का कहना है कि वे आते तो हैं पर तय समय से पहले ही अस्पताल बंद कर चले जाते हैं।
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करीब दस बेड वाले इस अस्पताल में दो वार्ड हैं जो खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं। तीन ओर से इनकी दीवारें गिर गई हैं, बेड सड़ गए हैं। इसमें वार्ड नंबर एक के भवन की हालत कुछ हद तक ठीक है तो यहां मेडिकल उपकरण आदि रखने का गोदाम बना लिया गया है। वार्ड नंबर दो की दीवारें तो दरकती-ढहती जा रही हैं। छत इतनी जर्जर हो गई है कि बारिश में ही कब गिर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।
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गर्मी और बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में खान-पान पर ध्यान न देने की वजह से डायरिया, कालरा आदि बीमारियों का खतरा बना रहता है। बरसात में गंदे पानी के जमा होने से पेट और चर्म रोग संबंधी बीमारियां, आई फ्लू आदि से लोग परेशान रहते हैं। ऐसे में जब संक्रामक रोगों का इलाज करने वाले अस्पताल का ही बुरा हाल है तो मरीजों का कैसे इलाज होगा...?



नगर निगम के अपर नगर आयुक्त बीके द्विवेदी ने कहा कि नगर निगम के मूल बजट 2016-17 में अस्पताल के रख-रखाव एवं दवाओं के लिए पांच लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। मरीजों को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए अस्पताल में सभी जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाने के साथ ही व्यवस्था में सुधार कराया जाएगा।
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