महाशिवरात्रि 2022: गंगधार से गंगाधर तक एकाकार हुई आस्था की कतार, चार लाख से ज्यादा भक्तों ने किए दर्शन
महाशिवरात्रि पर महादेव की नगरी काशी में भगवान शिव के विवाह उत्सव का उल्लास जन-जन पर नजर आया।
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गंगधार से गंगाधर के दरबार तक आस्था की कतार एकाकार नजर आई। महाशिवरात्रि के महापर्व पर श्रद्धालुओं का ऐसा रेला उमड़ा की शिव की नगरी बस हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजती रही। देर रात तक चार लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई।
स्वर्णमयी गर्भगृह में श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन किए। हालांकि दशाश्वमेध से बाबा दरबार तक की लगभग सवा किमी की दूरी तय करने में भक्तों को साढ़े तीन घंटे का समय लगा। मंगलवार को सुबह 3.30 बजे बाबा दरबार का गर्भगृह खुला तो साज शृंगार के बाद बाबा का दर्शन पूजन शुरू हो गया।
सभी प्रमुख द्वारों से लोगों के आने और दर्शन पूजन व जलाभिषेक का क्रम जारी रहा। सुबह दस बजे तक लगभग एक लाख श्रद्धालु बाबा दरबार में दर्शन पूजन कर चुके थे और एक बजे तक यह आंकड़ा ढाई लाख तक पहुंच गया। पिछले साल ढाई लाख श्रद्धालुओं ने बाबा दरबार में दर्शन किए थे।
आस्थावानों ने सुबह से ही बाबा दरबार में पहुंचकर शीश झुकाया और बाबा का प्रसाद लेकर मंदिर परिसर का भ्रमण भी किया। वहीं दोपहर में पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश भी मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था व दर्शन पूजन की पूरी निगरानी को लेकर सभी को सतर्क रहने की हिदायत दी।
भूतभावन की निकली बरात, झूमे भूत-पिशाच
महाशिवरात्रि पर महादेव की नगरी काशी में भगवान शिव के विवाह उत्सव का उल्लास जन-जन पर नजर आया। भूतभावन जब दूल्हा बनकर निकले तो उनके पीछे भूत-पिशाच की टोलियां भी शामिल हुईं। अबीर, गुलाल और भस्म उड़ाते शिवभक्त झूमते, नाचते और गाते हुए चल रहे थे। शिव बरात में घोड़ा, ऊंट, नंदी बैल, सपेरा और मदारी के प्रतिरूप आकर्षण का केंद्र थे।
डोमरी में चल रहे सीताराम नामजप रुद्रमहायज्ञ के नौवें दिन मंगलवार को महाशिवरात्रि पर शिव बरात निकाली गई। शिव अपने गणों के साथ पूरी टोली में बरात लेकर निकले, रास्ते भर श्रद्धालु बरात के स्वागत में पुष्पवर्षा करते चल रहे थे।
पहली बार मिला गंगा द्वार से प्रवेश, निभाई गई विवाह की रस्म
वहीं त्रिपोलिया चौक के पास 51 सिल्ली का बना शिवलिंग आकर्षण का केंद्र बना रहा। सभासद राजू सोनकर की ओर से बर्फ का शिव लिंग, गणेश जी एवं नंदी की मूर्ति स्थापित की गई थी। बटाऊबीर से हनुमान मंदिर के पास पुनवासी जायसवाल के नेतृत्व में बरात का स्वागत किया गया।
अव्यवस्था भी दिखाई दी
काशी विश्वनाथ मंदिर में अव्यवस्था भी नजर आई। एक तरफ सड़क मार्ग पर लोग चार घंटे से कतार में खड़े रहे। वहींललिता घाट की तरफ से बने गंगा प्रवेश द्वार पर लगभग सन्नाटे जैसी स्थिति रही। गंगा घाट से प्रवेश करने के बाद लोग मंदिर चौक के द्वार तक पहुंचे मगर वहां से उन्हें वापस लौटा दिया गया, जबकि कॉरिडोर के एक छोटे से गलियारे से प्रवेश मार्ग बनाया गया था। मार्ग पर लगे पोस्टर इतने छोटे थे कि उन पर लिखा प्रवेश द्वार पर लोगों की नजर ही नहीं पड़ रही थी।