अस्पताल भवन निर्माण घोटाले की जांच में एसआईटी ने कसा शिकंजा, फाइल तलब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही Updated Mon, 02 Mar 2020 01:39 AM IST
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भदोही जिले में निर्माणाधीन सौ बेड वाले अस्पताल का काम देख रही कार्यदायी संस्था और पूर्व के ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एसआईटी ने नौ करोड़ की घोटाले की जांच में शिकंजा कस दिया है। स्वास्थ्य विभाग से पूरी पत्रावली को तलब कर लिया है। मामला दो बार सदन में भी उठ चुका है।
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स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए वर्ष 2008 में बसपा शासन में जिला मुख्यालय के सामने 14 करोड़ की लागत से सौ बेड वाले अस्पताल की योजना को स्वीकृति मिली थी। इसके निर्माण का जिम्मा राजकीय निर्माण निगम को दिया गया। अस्पताल निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था ने करीब छह ठेकेदार बदले, लेकिन 11 साल बाद भी अस्पताल हैंडओवर नहीं हो सका। ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र के साथ ही औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर इस मामले को सदन में भी उठा चुके हैं। 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने निर्माणाधीन अस्पताल की निजी एजेंसी से जांच कराई।
उस दौरान करीब आठ करोड़ 33 लाख की घपलेबाजी सामने आई थी। मामले में कार्यदायी संस्था के तत्कालीन परियोजना प्रबंधक गिरजाशंकर दीक्षित, ठेकेदार रामकुमार सिंह, हंसराज सिंह, मुंशी सिंह के खिलाफ धारा 406, 409 के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया। जिन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है, उसमें सरकारी धन का गबन और आपराधिक न्यास भंग करना प्रमुख रहा। परियोजना प्रबंधक को जेल भी जाना पड़ा, हालांकि अभी वह जमानत पर हैं। 14 करोड़ की लागत वाले अस्पताल पर अब तक 18 करोड़ से अधिक रकम खर्च हो चुकी है, लेकिन अस्पताल चालू नहीं हो सका है।
कुछ माह पूर्व विशेष सचिव स्वास्थ्य विभाग की संस्तुति पर गृह विभाग ने जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को सौंप दी। करीब 15 दिन पूर्व एसआईटी ने पूरे प्रकरण की फाइल स्वास्थ्य विभाग से तलब की। माना जा रहा है कि इस मामले में शुरूआती घपलेबाजी करने वाले ठेकेदार की मुश्किल बढ़ सकती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि एसआईटी ने कुछ फाइलों की मांग की थी, जिसे भेज दिया गया है।

खास बातें 

  • 2008 में राजकीय निर्माण निगम ने शुरू किया सौ बेड वाले वाले अस्पताल का निर्माण।
  • 2012 में तैयार हो जाना था, 2020 तक अपूर्ण है अस्पताल।
  • 2013 में तत्कालीन डीएम अमृत त्रिपाठी ने कराई जांच
  • 9 करोड़ का घपला उजागर हुआ था। परियोजना प्रबंधक समेत पांच पर दर्ज हुआ केस।
  • 2016 में परियोजना प्रबंधक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
  • 2019 में सदन में मामला उठने पर गृह सचिव ने एसआईटी जांच के लिए दी अनुमति।
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