नाव से राखी बांधने पहुंचीं बहनें: सरयू का पानी तो घटा, दुश्वारियां बरकरार; आजमगढ़ में जारी है बाढ़ का कहर
आजमगढ़ में सरयू नदी का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में दुश्वारियां बरकरार हैं। आवागमन प्रभावित होने से लोगों को अब भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों को राखी बांधने के लिए नाव से पहुंचीं। जलभराव और रास्ते बाधित होने के कारण ग्रामीणों की परेशानी कम नहीं हुई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरयू नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन तटवर्ती इलाकों के लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पानी कम होने के साथ ही नदी के किनारों पर कटान का खतरा बढ़ गया है।
कई गांवों के सामने दोबारा कटान शुरू होने से किसान अपनी जमीन और फसल को लेकर चिंतित हैं। वहीं, बाढ़ के कारण संपर्क मार्ग टूटने से आवागमन अभी भी बाधित है। बृहस्पतिवार को बहनें नाव पर सवार होकर भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं।
देवारा खास राजा, सहवदिया और बरामदपुर गांव के सामने सरयू नदी ने फिर कटान शुरू कर दिया है। नदी के घटते जलस्तर के बीच कटान तेज होने से तटवर्ती किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि पानी घटने के बाद भी खेतों और जमीन को बचाने की चुनौती बनी हुई है। कटान इसी तरह जारी रहा तो कई किसानों की जमीन नदी में समा सकती है। सबदहिया गांव के जगदीश, शिरवल, छांगुर, संतराज, विंध्याचल आदि का खेत कट रहा है।
दो दिनों के भीतर करीब 12 बिस्वा जमीन समा चुकी है। वहीं, देवारा खास राजा गांव के रमाकांत, रूप नारायण, रामलवट, वृजभान, मुन्नीलाल, विनोद आदि की जमीन कटकर नदी में समाहित हो रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों के सामने चारे की समस्या भी बनी हुई है।
पानी के कारण खेतों और रास्तों तक पहुंच मुश्किल होने से पशुओं के लिए पर्याप्त चारा जुटाना चुनौती बन गया है। इससे पशुपालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रक्षाबंधन पर्व को लेकर भी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बेलहिया ढाले से अजगरा और अजगरा मगरवी जाने वाला संपर्क मार्ग टूट जाने के कारण लोग नाव से आवागमन करने को मजबूर हैं। बहनें भाइयों को राखी बांधने के लिए नाव से नदी पार कर अपने मायके पहुंच रही हैं।
छोटे बच्चों को इलाज के लिए ले जाने में भी नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर घटने के साथ अब कटान का खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन से प्रभावित गांवों में कटान रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है।
बदरहुआ पर 30 और डिघिया में 39 सेमी घटा जलस्तर
सरयू नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली है। बुधवार की शाम चार बजे बदरहुआ नाले पर जलस्तर 71.32 मीटर दर्ज किया गया था, जो बृहस्पतिवार को 30 सेंटीमीटर घटकर 71.02 मीटर हो गया। डिघिया नाले पर भी जलस्तर में 39 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। बुधवार को यहां जलस्तर 70.60 मीटर था, जो बृहस्पतिवार को घटकर 70.21 मीटर हो गया। डिघिया नाले का खतरा बिंदु 70.40 मीटर निर्धारित है। बृहस्पतिवार को यहां जलस्तर 70.21 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरा बिंदु से 19 सेंटीमीटर नीचे है।
डिघिया नाले का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर और अधिकतम 72.59 मीटर है। बदरहुआ नाले पर खतरा बिंदु 71.68 मीटर है। वर्तमान जलस्तर 71.02 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरा बिंदु से 66 सेंटीमीटर नीचे है। यहां न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर और अधिकतम 73.52 मीटर दर्ज किया गया है। जलस्तर में कमी से नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा फिलहाल कम हो गया है।
नेपाल जलप्रलय का सरयू पर असर नहीं, प्रशासन चौकन्ना
नेपाल से आए तूफान के बाद बिहार में कोसी नदी के बढ़े जलस्तर और तबाही की खबरों से आजमगढ़ के सरयू तटवर्ती क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ गई है। लोग मोबाइल और टेलीविजन के माध्यम से पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। हालांकि, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोसी नदी में आई बाढ़ का आजमगढ़ में सरयू नदी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सिंचाई विभाग के अनुसार, बिहार में कोसी नदी के बढ़े जलस्तर का असर मुख्य रूप से महाराजगंज और कुशीनगर जिले से होकर गुजरने वाली गंडक नदी पर पड़ेगा। इसका कुछ प्रभाव गोरखपुर क्षेत्र में राप्ती नदी पर भी पड़ सकता है, लेकिन आजमगढ़ में सरयू नदी इससे प्रभावित नहीं होगी। इस संबंध में अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कोसी नदी की स्थिति का सरयू नदी पर नाममात्र का भी असर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।