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लाखों दीये, जगमग आंखें
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 26 Nov 2015 02:51 AM IST
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उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर काशी में बुधवार की दीपमालाओं में आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता के साथ ही विश्व शांति, प्रेम के भाव सजाए गए। किसी घाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमामि गंगे और स्वच्छ भारत अभियान को दीप ज्योति के जरिए आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया तो कहीं मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम की यादें पिरोई गईं।
स्मार्ट सिटी का सपना भी उन्हीं दीयों में जगमग हुआ और राष्ट्रीय एकता का नारा भी। पेरिस हमले की स्मृति एफिल टावर पर दीप जले तो इंडिया गेट की रिप्लिका सजाकर अमर शहीदों के नाम पर पुष्परीथ अर्पित किया गया। अस्सी से राजघाट तक इसी तरह संदेश परक दीपों की लड़ियों को सजाकर काशी ने जग विख्यात देवदीपावली महोत्सव को यादगार बनाया।
इस दौरान घाट-घाट पर आतिशबाजी हुई और इस मौके को संगीतमय बनाकर लोगों के जेहनोजिदल में बसाने की कोशिश की गई। उन क्षणों की झलक पाने के लिए राजनेताओं, मंत्रियों, फिल्मी सितारों और कलाकारों ने भी आमद दर्ज कराई।
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सांझ ढलते ही पूर्णिमा का चांद एक तरफ आकार लेने लगा दूसरी ओर खुशियों के उपहार के मानिंद कतारबद्ध दीये जलाए जाने लगे। घाटों की सीढ़ियों, मढ़ियों, बुर्जियों और फर्श पर फूलों, रंगों की रंगोलियों के साथ ही तरह -तरह की डिजाइन को युवक-युवतियों, घरेलू महिलाओं और कलाकारों ने दिन ढलने से पहले ही सजा दिया था।
घरों से दीया-बाती लेकर कुछ महिलाएं गीत गाते हुए सीढ़ियों से उतरीं। शाम साढ़े पांच बजे तक देखते-देखते गंगा का सात किमी किनारा दीयों की तरह-तरह की अल्पनाओं से प्रज्ज्वलित होने लगा। राणामहल घाट पर आई मिस यू कलाम सर... को लिखकर दीयों से सजाया गया था।
इसी तरह दरभंगा घाट पर नमामि गंगे और स्वच्छभारत अभियान के नारे के साथ पीएम नरेंद्र मोदी की तसवीर सजाई गई थी। मंदिरों, शिखरों, भवनों के बारजों तक रंग-बिरंगी लतरें हर मन को तमसो मां ज्योतिर्गमय के संदेश से जोड़ रही थीं। चौसट्ठी घाट पर युवकों ने चांदी के स्टैंड पर मोरपंखी को दीयों से सजाया था।
इसी तरह पांडेय घाट पर स्वास्तिक, कलश की रंगोली बनाई गई थी तो स्मार्ट सिटी का नारा भी दीपों में साकार हो रहा था। मानसरोवर घाट पर आंध्र प्रदेश, कनार्टक के श्रद्धालुओं ने डमरु, त्रिशूल के साथ ही दीयों में प्रेम-बंधुत्व के भाव सजाए और भरत नाट्यम नृत्य से उस मौके को यादगार बनाया।
हरिश्चंद्र श्मशान घाट पर भी दीयों में स्वच्छता के संदेश रचे गए और वहां डीजे पर युवकों ने घंटों नृत्य किया। केदार घाट, हनुमान घाट, शिवाला घाट पर भी जीप ज्योति की अल्पनाएं लोगों को खींचती रहीं। जैन घाट पर अहिंसा परमो धर्म का संदेश दीयों से सजाया गया था।
कहीं सरदार भगत सिंह तो कहीं भारत का नक्शा बनाकर लोगों ने आजादी के दीवानों को भी याद किया। तुलसी घाट पर संकट मोचन फाउंडेशन और रेलवे के सहयोग से एफिल टावर सजाया गया और कंस के पुतले का दहन भी हुआ। इस मौके पर संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने आंतकवाद के विरुद्ध एकजुटता का संदेश दिया और शपथ भी दिलाई।
गंगा की मध्य धारा पर सैकड़ों नावों, फूलों, मसनद, चांदनी से सजे बजरों पर संगीतमय प्रस्तुतियों के साथ विदेशी सैलानियों के समूह ही नहीं कारपोरेट घरानों के लोग, अफसर और रईस भी उन क्षणों को आत्मसात करने के लिए निकले।
कई बार नावों-बजरों की कतारें एक-दूसरे से टकराते हुए भी निकलती दखी गईं। नावों से भी लोग दीये जलाकर गंगा की धारा पर बहा रहे थे। इससे घाटों के सामने दीपों की लड़ियां गंगा में तैरती हुए एक अलग एहसास करा रही थीं।
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स्मार्ट सिटी का सपना भी उन्हीं दीयों में जगमग हुआ और राष्ट्रीय एकता का नारा भी। पेरिस हमले की स्मृति एफिल टावर पर दीप जले तो इंडिया गेट की रिप्लिका सजाकर अमर शहीदों के नाम पर पुष्परीथ अर्पित किया गया। अस्सी से राजघाट तक इसी तरह संदेश परक दीपों की लड़ियों को सजाकर काशी ने जग विख्यात देवदीपावली महोत्सव को यादगार बनाया।
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इस दौरान घाट-घाट पर आतिशबाजी हुई और इस मौके को संगीतमय बनाकर लोगों के जेहनोजिदल में बसाने की कोशिश की गई। उन क्षणों की झलक पाने के लिए राजनेताओं, मंत्रियों, फिल्मी सितारों और कलाकारों ने भी आमद दर्ज कराई।
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सांझ ढलते ही पूर्णिमा का चांद एक तरफ आकार लेने लगा दूसरी ओर खुशियों के उपहार के मानिंद कतारबद्ध दीये जलाए जाने लगे। घाटों की सीढ़ियों, मढ़ियों, बुर्जियों और फर्श पर फूलों, रंगों की रंगोलियों के साथ ही तरह -तरह की डिजाइन को युवक-युवतियों, घरेलू महिलाओं और कलाकारों ने दिन ढलने से पहले ही सजा दिया था।
घरों से दीया-बाती लेकर कुछ महिलाएं गीत गाते हुए सीढ़ियों से उतरीं। शाम साढ़े पांच बजे तक देखते-देखते गंगा का सात किमी किनारा दीयों की तरह-तरह की अल्पनाओं से प्रज्ज्वलित होने लगा। राणामहल घाट पर आई मिस यू कलाम सर... को लिखकर दीयों से सजाया गया था।
इसी तरह दरभंगा घाट पर नमामि गंगे और स्वच्छभारत अभियान के नारे के साथ पीएम नरेंद्र मोदी की तसवीर सजाई गई थी। मंदिरों, शिखरों, भवनों के बारजों तक रंग-बिरंगी लतरें हर मन को तमसो मां ज्योतिर्गमय के संदेश से जोड़ रही थीं। चौसट्ठी घाट पर युवकों ने चांदी के स्टैंड पर मोरपंखी को दीयों से सजाया था।
इसी तरह पांडेय घाट पर स्वास्तिक, कलश की रंगोली बनाई गई थी तो स्मार्ट सिटी का नारा भी दीपों में साकार हो रहा था। मानसरोवर घाट पर आंध्र प्रदेश, कनार्टक के श्रद्धालुओं ने डमरु, त्रिशूल के साथ ही दीयों में प्रेम-बंधुत्व के भाव सजाए और भरत नाट्यम नृत्य से उस मौके को यादगार बनाया।
हरिश्चंद्र श्मशान घाट पर भी दीयों में स्वच्छता के संदेश रचे गए और वहां डीजे पर युवकों ने घंटों नृत्य किया। केदार घाट, हनुमान घाट, शिवाला घाट पर भी जीप ज्योति की अल्पनाएं लोगों को खींचती रहीं। जैन घाट पर अहिंसा परमो धर्म का संदेश दीयों से सजाया गया था।
कहीं सरदार भगत सिंह तो कहीं भारत का नक्शा बनाकर लोगों ने आजादी के दीवानों को भी याद किया। तुलसी घाट पर संकट मोचन फाउंडेशन और रेलवे के सहयोग से एफिल टावर सजाया गया और कंस के पुतले का दहन भी हुआ। इस मौके पर संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने आंतकवाद के विरुद्ध एकजुटता का संदेश दिया और शपथ भी दिलाई।
गंगा की मध्य धारा पर सैकड़ों नावों, फूलों, मसनद, चांदनी से सजे बजरों पर संगीतमय प्रस्तुतियों के साथ विदेशी सैलानियों के समूह ही नहीं कारपोरेट घरानों के लोग, अफसर और रईस भी उन क्षणों को आत्मसात करने के लिए निकले।
कई बार नावों-बजरों की कतारें एक-दूसरे से टकराते हुए भी निकलती दखी गईं। नावों से भी लोग दीये जलाकर गंगा की धारा पर बहा रहे थे। इससे घाटों के सामने दीपों की लड़ियां गंगा में तैरती हुए एक अलग एहसास करा रही थीं।