{"_id":"6692b783d60bed112b0e1592","slug":"sikkim-kashi-sanskriti-sammelan-begins-with-vedic-mantras-in-varanasi-three-day-event-grand-ceremony-2024-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: वेद मंत्रों के साथ सिक्किम काशी संस्कृति समागम शुरू, तीन दिनी होगा आयोजन; हुआ भव्य अनुष्ठान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: वेद मंत्रों के साथ सिक्किम काशी संस्कृति समागम शुरू, तीन दिनी होगा आयोजन; हुआ भव्य अनुष्ठान
Sat, 13 Jul 2024 10:51 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sat, 13 Jul 2024 10:51 PM IST
सार
Varanasi News: इस अनुष्ठान में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और पत्नी कुमुद देवी मुख्य यजमान रहे। इस आयोजन में सिक्किम और काशी की समृद्ध सांस्कृतिक संगम से पहले दिन की पूजा विधिवत संपन्न हुई।
विज्ञापन
महोत्सव में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सिक्किम के धन-धान्य, सुख-समृद्धि की अभिवृद्धि व राष्ट्र की मंगलकामना के साथ राजभवन में तीन दिवसीय शिवमंदिर पुनर्नवीकरण एवं सुंदरीकरण तथा नंदीश्वर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव शनिवार से शुरू हुआ। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र पांडेय के नेतृत्व में आठ सदस्यीय दल ने तीन दिवसीय अनुष्ठान का श्रीगणेश किया।
विज्ञापन
महोत्सव के दौरान गणपति पूजन, कलश पूजन, हवन, नवग्रह होम, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठान,मंत्र पुष्पांजलि का अनुष्ठान हुआ। अनुष्ठान का समापन 15 जुलाई को होगा। जिसमें विशेष पूजा और संस्कृत भाषा का विकास पर संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।
विज्ञापन
इस संगोष्ठी में संस्कृत से संबंधित विश्विद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय स्तर के शिक्षकों आमंत्रित किया गया है। इस अनुष्ठान में विशेष रूप से गंगटोक के प्रसिद्ध गुरु दिवाकर प्रधान ने शिवमंदिर पुनर्नवीकरण में कई महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए मार्गदर्शन दिया। राज्यपाल ने सभी विद्वानों का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
इस अनुष्ठान में बीएचयू से प्रो. भगवत शरण शुक्ल, प्रो. पतंजलि मिश्र, प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, प्रो. नारायण प्रसाद भट्ट राई, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के अनुपम दीक्षित, डॉ. मणि झा, डॉ. उत्तम ओझा, चार धाम नामची से पं. छबीलाल अधिकारी, पं. निर्मल गौतम, पं. पदम प्रसाद पोखरेल, पं. गंगाराम साप कोटा एवं तिब्बत रोड, गंगटोक के प्रसिद्ध गुरु दिवाकर प्रधान मौजूद रहे।