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वाराणसी: पंचायत चुनाव के परिणाम से पूर्वांचल में परिवर्तन के संकेत, एक ओर जहां सपा की सियासी जमीन हुई मजबूत तो वहीं भाजपा के लिए खतरे की घंटी

Thu, 06 May 2021 07:47 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 06 May 2021 07:47 PM IST
सार

2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले पंचायत चुनाव को सेमीफाइनल की तरीके से देखा जा रहा है

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Signs of change in Purvanchal by the result of Panchayat elections, on one hand, while the SP's political ground has strengthened, there is a danger bell for BJP.
पीएम मोदी - फोटो : amar ujala

विस्तार

वाराणसी में उत्तर प्रदेश की सत्ता की चाबी कहे जाने वाले पूर्वांचल में पंचायत चुनाव के नतीजे परिवर्तन के संकेत दे रहे हैं। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले पंचायत चुनाव को सेमीफाइनल की तरीके से देखा जा रहा है। परिणाम आने के बाद एक ओर जहां सपा की सियासी जमीन पूर्वांचल में मजबूत होती दिख रही है तो वहीं भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले पूर्वांचल में भाजपा की सियासी जमीन खिसकने लगी है। गोरखपुर और वाराणसी में भाजपा को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। जिला पंचायत के चुनाव में सपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। माना जाता है कि पूर्वांचल में जिस पार्टी की पैठ होती है। वही पार्टी सत्ता पर काबिज होती है। 
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Signs of change in Purvanchal by the result of Panchayat elections, on one hand, while the SP's political ground has strengthened, there is a danger bell for BJP.
सपा के राष्ट्रीय अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी पूर्वांचल के गोरखपुर जिले से हैं तो वही सपा के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजमगढ़ के सांसद हैं। उनकी भी नजर पूर्वांचल पर है।  ऐसा माना जाता है कि पूर्वांचल का मतदाता कभी किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहा है। यही कारण है कि 2007 में जहां बसपा पर विश्वास जताया था तो वहीं 2012 में सपा को जनमत दिया था। 2017 के चुनाव में भाजपा पर विश्वास किया था। 2022 के चुनाव में जनता किस ओर करवट लेगी पंचायत चुनाव से संकेत मिलने लगे हैं।

यूपी में पूर्वांचल से तकरीबन 33 प्रतिशत सीटें आती हैं। पूर्वांचल के 28 जिलों से 164 विधानसभा सीटें आती हैं। पूर्वांचल की राजनीतिक दशा और दिशा वाराणसी, जौनपुर, भदोही, आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, संत कबीरनगर बस्ती, मऊ, गाजीपुर, बलिया, बहराइच, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज आदि तय करते हैं। पंचायत चुनाव के परिणाम में तकरीबन 25 प्रतिशत वोट सपा को मिले हैं तो वही भाजपा और बसपा तकरीबन 15 प्रतिशत वोट प्राप्त किए हैं।

 
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Signs of change in Purvanchal by the result of Panchayat elections, on one hand, while the SP's political ground has strengthened, there is a danger bell for BJP.
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती - फोटो : amar ujala
बुआ और बबुआ फिर हुए एक तो भाजपा की राह आसान नहीं
चुनावी रणनीतिकार यह मान रहे हैं कि इस बार यदि बुआ और बबुआ फिर से एक हुए तो भाजपा को सियासी जमीन बचानी मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि पंचायत चुनाव के परिणाम में बसपा भाजपा का वोटिंग प्रतिशत आसपास ही है। जबकि सपा भाजपा से बहुत आगे है। ग्रामीण इलाकों में 60 प्रतिशत जनता निवास करती है और पंचायत चुनाव के परिणाम ने दिखा दिया कि एक चौथाई जनता सपा के साथ है।
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