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श्यामा प्रसाद को मिला था बीएचयू के कार्यवाहक वीसी का प्रस्ताव
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राष्ट्रीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी का काशी से गहरा नाता था। वे महामना पं. मदन मोहन मालवीय के बेहद करीबी थे। अक्सर काशी यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात भी महामना से होती थी। बीएचयू में उन्हें एक बार कार्यवाहक वीसी का प्रस्ताव मिला, लेकिन वे आ नहीं पाए। बीएचयू के रजत जयंती समारोह में 1942 में श्यामा प्रसाद ने शिरकत की। 23 जून को उनकी पुण्यतिथि है।
बीएचयू में सर्वपल्ली डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के वीसी नियुक्त होने के बाद उन्होंने महामना को केवल छह महीने ही सेवा देने की जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि इसके बाद वह विदेश चले जाएंगे। महामना के निर्देशन में डॉ. राधाकृष्णन के बचे कार्यकाल के लिए कार्यवाहक वीसी का नाम श्याम प्रसाद मुखर्जी का नाम आया। कार्यकारिणी परिषद ने भी मुखर्जी के नाम पर मुहर लगा दी थी, लेकिन राधाकृष्णन विदेश नहीं जा पाए तो श्यामा प्रसाद को कार्यवाहक वीसी के लिए बुलाने की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि 1942 में बीएचयू के रजत जयंती समारोह में श्याम प्रसाद जी शामिल हुए। मंच पर महामना मालवीय, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित अन्य गणमान्य लोग भी बैठे थे।
एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भी थे मुखर्जी
बनारस के विभूतियों और क्रांतिकारियों पर शोध करने वाले नित्यानंद राय ने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी बीएचयू एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भी थे। रजत जयंती के बाद वह 21अक्तूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना के बाद भी वे काशी आए। डॉ. मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। संसद में अपने भाषण में डॉ. मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की।
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जन्म -6 जुलाई 1901, कोलकाता
मृत्यु -23 जून 1953, श्रीनगर
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बीएचयू में सर्वपल्ली डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के वीसी नियुक्त होने के बाद उन्होंने महामना को केवल छह महीने ही सेवा देने की जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि इसके बाद वह विदेश चले जाएंगे। महामना के निर्देशन में डॉ. राधाकृष्णन के बचे कार्यकाल के लिए कार्यवाहक वीसी का नाम श्याम प्रसाद मुखर्जी का नाम आया। कार्यकारिणी परिषद ने भी मुखर्जी के नाम पर मुहर लगा दी थी, लेकिन राधाकृष्णन विदेश नहीं जा पाए तो श्यामा प्रसाद को कार्यवाहक वीसी के लिए बुलाने की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि 1942 में बीएचयू के रजत जयंती समारोह में श्याम प्रसाद जी शामिल हुए। मंच पर महामना मालवीय, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित अन्य गणमान्य लोग भी बैठे थे।
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एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भी थे मुखर्जी
बनारस के विभूतियों और क्रांतिकारियों पर शोध करने वाले नित्यानंद राय ने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी बीएचयू एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भी थे। रजत जयंती के बाद वह 21अक्तूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना के बाद भी वे काशी आए। डॉ. मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। संसद में अपने भाषण में डॉ. मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की।
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जन्म -6 जुलाई 1901, कोलकाता
मृत्यु -23 जून 1953, श्रीनगर