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UP: GST से मुक्त हो कफन-लकड़ी...यह मुनाफा कमाने का जरिया नहीं, काशी के व्यापारियों ने रखी बात; बैठक में चर्चा

Sun, 23 Nov 2025 11:11 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 23 Nov 2025 11:11 AM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड की सदस्य ने व्यापारियों के साथ बैठक की। जीएसटी में आ रही समस्याओं को लेकर उनसे बातचीत की गई। जीएसटी के नियमों को और सरल बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए।

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Shrouds and wood should be exempt from GST this is not source of profit Kashi traders said
राज्य कर विभाग की बैठक में माैजूद लोग। - फोटो : संवाद

विस्तार

नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड की सदस्य डॉ. स्मिता शाह की बैठक में व्यापारियों एवं उद्यमियों ने जीएसटी और व्यापार से जुड़ी समस्याएं गिनाईं। डॉ. स्मिता ने सभी समस्याओं को सुना और समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की सभी समस्याओं को सरकार के समक्ष रखा जाएगा। हर सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से व्यापारियों की समस्या का समाधान किया जाएगा। 

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वाराणसी व्यापार मंडल अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने मांग की कि दाह संस्कार में इस्तेमाल होने वाले सामान जैसे कफन, लकड़ी, उपले, मिट्टी के पात्र, बांस, रस्सी आदि को जीएसटी से पूरी तरह मुक्त किया जाए। ये सामान व्यापारिक लाभ कमाने के उद्देश्य से न होकर अंतिम संस्कार के लिए होता है। 

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उठी मांग
उन्होंने मांग की कि वर्तमान में 40 लाख तक के सालाना टर्नओवर पर जीएसटी पंजीकरण में छूट मिलती है, इसे एक करोड़ किया जाए। इससे छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। जरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने कहा कि समय के साथ जीएसटी में अधिकतर सुविधाएं ऑनलाइन हो गई हैं। विभाग की ओर से किसी भी व्यापारी को नोटिस ऑनलाइन भेजने का नियम है। 

यदि व्यापारी ऑनलाइन उपस्थित नहीं होता है, तो मैनुअल नोटिस भेजने की अनिवार्यता हो। दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि जीएसटी में कई अच्छे बदलाव हुए हैं। दवाएं सस्ती हुई हैं। बैठक में लहुराबीर व्यापार मंडल अध्यक्ष शिवप्रकाश, चौकाघाट व्यापार मंडल अध्यक्ष गणेश मिश्रा मौजूद रहे। 

सेवईं पर नहीं लगता था टैक्स
सेवईं व्यापार मंडल के अध्यक्ष सचिन मौर्या ने बताया कि 2017 से पहले सेवईं के कारोबार पर टैक्स नहीं था। यह कुटीर उद्योग था। जीएसटी आने के बाद से सेवई के कारोबार पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगने लगी। इससे बड़ी कंपनियों को फायदा होने लगा और कुटीर उद्योगों में कमी आने लगी।

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