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मानव जीवन की व्यथा मिटाने का सर्वोत्तम साधन है राम कथा
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मानव जीवन की व्यथा मिटाने का सर्वोत्तम साधन रामकथा है। रामकथा से लोक परलोक दोनों संवरते हैं। उक्त विचार बुधवार को नरहरिपुरा स्थित पातालपुरी मठ में चल रहे 33वें मानस नवाह्न पारायण एवं श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन मानस मर्मज्ञ पं. गंगासागर पांडे ने व्यक्त किए।
जटायु की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि रावण द्वारा बलपूर्वक सीता जी का अपहरण करते देख जटायु ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर बचाने का प्रयास किया। फलस्वरूप जटायु को उत्तम गति मिली जो ऋषि और मुनियों के लिए भी दुर्लभ है। समाज में जो किसी अबला का अपहरण करता है, वही रावण है अर्थात राक्षस है, जो बचाने का प्रयास करता है वह गिद्ध होते हुए भी सिद्ध है।
इस अवसर पर पातालपुरी मठ के महंत बालक दास महाराज ने भी आज के प्रसंग की विशद व्याख्या की। इससे पूर्व प्रात: दैनिक पूजन सम्पन्न कराया गया। तदोपरान्त श्रीराम तिवारी के आचार्यत्व में भूदेवों ने मानस नवाह्न पारायण का संगीतमय पाठ किया। कथा के अंत में समिति के अध्यक्ष रविशंकर सिंह, गिरीश चंद्र, रविप्रकाश जायसवाल, इन्दुशेखर तिवारी, परमहंस दूबे, बनवारी लाल गुप्त, जयशंकर गुप्ता, सालिकराम सेठ, आदि ने रामपंचायतन की आरती उतारी।
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जटायु की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि रावण द्वारा बलपूर्वक सीता जी का अपहरण करते देख जटायु ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर बचाने का प्रयास किया। फलस्वरूप जटायु को उत्तम गति मिली जो ऋषि और मुनियों के लिए भी दुर्लभ है। समाज में जो किसी अबला का अपहरण करता है, वही रावण है अर्थात राक्षस है, जो बचाने का प्रयास करता है वह गिद्ध होते हुए भी सिद्ध है।
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इस अवसर पर पातालपुरी मठ के महंत बालक दास महाराज ने भी आज के प्रसंग की विशद व्याख्या की। इससे पूर्व प्रात: दैनिक पूजन सम्पन्न कराया गया। तदोपरान्त श्रीराम तिवारी के आचार्यत्व में भूदेवों ने मानस नवाह्न पारायण का संगीतमय पाठ किया। कथा के अंत में समिति के अध्यक्ष रविशंकर सिंह, गिरीश चंद्र, रविप्रकाश जायसवाल, इन्दुशेखर तिवारी, परमहंस दूबे, बनवारी लाल गुप्त, जयशंकर गुप्ता, सालिकराम सेठ, आदि ने रामपंचायतन की आरती उतारी।
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