यात्रियों को लेकर चक्कर काटती रही सूरत से आई श्रमिक एक्सप्रेस
सूरत से गाजीपुर जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन श्रमिकों को लेकर वाराणसी और गाजीपुर के बीच चक्कर काटती रही। यह ट्रेन कैंट स्टेशन पर दो बार पहुंची लेकिन वाराणसी और आसपास के यात्रियों को उतारा नहीं जा सका और ट्रेन गाजीपुर पहुंच गई। गाजीपुर के श्रमिकों को उतारने के बाद सभी को ट्रेन से वापस कैंट स्टेशन भेजा गया। फिर भी यात्री कैंट स्टेशन पर नहीं उतारे गए। इसके बाद जब ट्रेन को मंडुवाडीह होते हुए आगे रवाना किया जाने लगा तो श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मंडुवाडीह में चेन पुलिंग कर हंगामा कर दिया।
दरअसल, सूरत से गाजीपुर को जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन सोमवार की रात में कैंट स्टेशन पहुंची। ट्रेन में गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, बलिया अन्य जनपदों के यात्री सवार थे। ट्रेन में सवार वाराणसी, चंदौली व जौनपुर के यात्रियों को कैंट स्टेशन पर नहीं उतारा गया। लिहाजा यह यात्री गाजीपुर पहुंच गए। गाजीपुर के यात्रियों को उतारकर अन्य यात्रियों को उसी ट्रेन से वापस वाराणसी भेज दिया गया।
दोबारा कैंट पहुंची ट्रेन से वाराणसी के यात्रियों को तो उतार लिया गया लेकिन चंदौली, जौनपुर और अन्य जिलों के यात्रियों को नहीं उतारा गया। जब इस ट्रेन को मंडुवाडीह होते हुए आगे भेजा गया तो यात्रियों ने मंडुवाडीह में चेन पुलिंग करने के बाद हंगामा कर दिया। इसके बाद आरपीएफ व जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों को समझाया-बुझाया।
इसके बाद फिर से उसी ट्रेन को दोबारा कैंट स्टेशन पर लाया गया। यहां पर यात्रियों की जांच के बाद रोडवेज बसों से उनके घरों को भिजवाया गया। इस दौरान कई यात्री यार्ड में कूदकर भाग भी निकले। ट्रेन के यात्रियों ने आरोप लगाया कि रेल प्रशासन ने सही जानकारी नहीं दी, जिससे गाजीपुर व वाराणसी का पांच से छह घंटे तक चक्कर काटना पड़ा।
यह पहले से तय था कि बीच के स्टॉपेज पर कोई यात्री न उतरेंगे और न सवार होंगे। इस तरह वाराणसी के यात्री यहां नहीं उतर सके। बाद में गाजीपुर से वापसी में 242 यात्री वाराणसी के उतार लिए गए थे। बाकी 426 यात्री जौनपुर और अन्य जिले के थे, वे नहीं उतरे। उन्हें लगा कि ट्रेन जौनपुर जाएगी, जिन्हें मंडुवाडीह से वापस लाकर बसों से सकुशल भेजा गया। अब यह भी तय हो गया कि जिस रूट के यात्री होंगे, वह उस स्टेशन पर उतर सकेंगे।
आनन्द मोहन, स्टेशन निदेशक