श्राद्ध की अमावस्या और शनिवार से बन रहा ये शुभ सुयोग, मोक्ष अमावस्या करेगी बाधाओं से दूर
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पितृपक्ष की तिथि 28 सितंबर को अमावस्या है, लेकिन इस तिथि को पर मोक्ष अमावस्या का योग बन रहा है। ऐसा शुभ सुयोग 20 साल बाद बन रहा है। इस दिन जल तर्पण से पितृ, तृप्त होंगे, साथ ही उनके आशीर्वाद से सफलता और समृद्धि के द्वार भी खुलेंगे। ये सुयोग सौ बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाला भी है।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि 16 दिन के श्राद्ध होते हैं। भाद्रपद की पूर्णिमा का एक दिन और अश्विन कृष्णपक्ष के 15 दिन को मिलाकर 16 दिन होते हैं। 28 सितंबर को शनिवार और श्राद्ध की अमावस्या का सुयोग इस मोक्ष अमावस्या की श्रेणी प्रदान कर रहा है। धृति योग के स्वामी जल देवता हैं इसलिए उस दिन पितरों का जल से तर्पण विशेष महत्व और प्रभाव वाला होगा।
अश्विन कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि के दिन सर्वपितरों का विसर्जन किया जाता है। तर्पण आदि पिंडदान करने के लिए सफेद या पीतवर्ण के वस्त्र धारण करने चाहिए। जो व्यक्ति श्राद्ध करने का सामर्थ्य नहीं रखता हो उन्हें मात्र जल में काला तिल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों को याद करके तिलांजलि देनी चाहिए। पितरों का श्राद्ध करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।
ब्रह्म पुराण के मुताबिक जो भी वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि द्वारा ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक दिया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध के माध्यम से पितरों को तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है। पिण्ड रूप में पितरों को दिया गया भोजन श्राद्ध का अहम हिस्सा होता है।
ज्योतिषाचार्य ने बातया कि 1999 में यह संयोग बना था, जब सर्वपितृ अमावस्या शनिवार को पड़ी थी। शास्त्रों के अनुसार पंचक के नक्षत्रों की गणना दोनों पक्षों, तिथि और दिवस के आधार पर की जाती है।