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यादों में शिवशंकर: व्हील चेयर से आकर मंगला आरती में प्रथम जलाभिषेक करने वाले काशी के शिव साधक का निधन

Mon, 08 Apr 2024 04:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 08 Apr 2024 04:19 PM IST
सार

Varanasi News: बाबा विश्वनाथ के परमभक्त भारती महाराज स्वयं चलते फिरते बाबा विश्वनाथ कहे जाते थे। उनके निधन के बाद अब काशी में कोई उतना बड़ा साधक नहीं है। वह अस्वस्थ होने के बाद भी व्हीलचेयर से रोजाना श्री काशी विश्वनाथ मंदिर आते थे।

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Shivshankar Bharati passes away who performed first Jalabhishek in Mangala Aarti a wheel chair
स्वामी शिवशंकर चैतन्य भारती महाराज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी के शिव साधक स्वामी शिवशंकर चैतन्य भारती (108) का रविवार की शाम को निधन हो गया। उन्होंने लक्सा स्थित रामकृष्ण मिशन अस्पताल में अंतिम सांस ली। मणिकर्णिका घाट के सामने उन्हें गंगा में जलसमाधि दी गई। पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ समेत काशी के संत, विद्वत समाज और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास से जुड़े सदस्यों व श्रद्धालुओं ने शोक जताया।

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काशी के विद्वानों ने कहा कि उनके निधन से साधना जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। बता दें कि श्री काशी विश्वनाथ जी के परम भक्त, स्वामी शिवशंकर चैतन्य भारती को उनके अनुयायी भगवान विश्वनाथ के चलते-फिरते स्वरुप के रूप में मानते थे। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने कहा कि भारती महाराज उच्चकोटि के साधक थे।
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उनके निधन से साधना जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। वह भगवान शिव के अनन्य भक्त थे और रोजाना बाबा विश्वनाथ का प्रथम जलाभिषेक करते थे। रोजाना वह बाबा की मंगला आरती में भी शामिल होते थे। वह कामाख्या मंदिर में अंबूवाची पर्व के बाद प्रथम पूजन के लिए काशी से जाते थे।
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न्यास सदस्य प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि बाबा विश्वनाथ के परमभक्त भारती महाराज स्वयं चलते फिरते बाबा विश्वनाथ कहे जाते थे। उनके निधन के बाद अब काशी में कोई उतना बड़ा साधक नहीं है। वह अस्वस्थ होने के बाद भी व्हीलचेयर से रोजाना श्री काशी विश्वनाथ मंदिर आते थे। उन्होंने 30 दिन से अन्न जल त्याग दिया और रामकृष्ण मिशन अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

महामृत्यंजय मंदिर के महंत परिवार के किशन दीक्षित ने कहा कि बाबा विश्वनाथ के परम आराधक व श्रीविद्या के प्रकांड विद्वान संत भारती महाराज के निधन से गहरा दुख हुआ है। यह हम सभी काशीवासियों के लिए अपूरणीय क्षति है।

20 वर्ष की आयु में लिया था संन्यास

विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि स्वामी शिवानंद भारती अनवरत भगवान विश्वनाथ की उपासना, साधना कर रहे थे। उन्होंने समाज से विरक्त होकर 20 वर्ष की उम्र में संन्यास स्वीकार कर लिया था। उन्होंने पत्नी का त्याग कर दिया था। भगवान विश्वनाथ के सानिध्य में प्रात: ढाई बजे से सायंकाल छह बजे तक अनवरत गर्भगृह में बैठ कर अभिषेक करते थे। यह क्रम उनका लगभग आठ दशकों तक चला।

राजस्थान में हुआ था जन्म
स्वामी शिवानंद भारती का जन्म राजस्थान के निमेड़ा गांव में हुआ था। उनकी साधना स्थली काशी में भगवान विश्वेश्वर के सानिध्य में ललिता घाट स्थित राजराजेश्वरी मंदिर के तृतीय तल पर थी। उनके पिता जगदीश चंद्र मिश्र संस्कृत के बड़े विद्वान थे। माता का नाम बाई बच्ची देवी था। उनके छोटे भाई प्रो. सुधांशु शेखर शास्त्री बीएचयू में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

एक्स पर प्रधानमंत्री की पोस्ट
भगवान विश्वनाथ के परम भक्त संत शिवशंकर चैतन्य भारती जी के महाप्रयाण का दुखद समाचार काशी से प्राप्त हुआ। वह मंगला आरती में बाबा विश्वनाथ की सेवा में अनवरत उपस्थित होते थे। उनका प्रयाण काशी की संत परंपरा के लिए बड़ी क्षति है। संत भारती महाराज के शिव स्वरूप में विलीन होने पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। ऊं शांति

मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी शिवशंकर चैतन्य भारती महाराज के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि चैतन्य भारती जी का जाना संत समाज और आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति एवं अथाह दुःख का क्षण है। उनके ब्रह्मलीन होने से एक युग का अंत हुआ है। ॐ शांति।

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