गंवई माटी से निकलकर शिवपाल अब टोक्यो ओलंपिक में दिखाएंगे दमखम
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दक्षिण अफ्रीका में चल रहे क्वालीफाइंग मुकाबले में 85.47 मीटर में भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक का टिकट पक्का करने वाले जिले के हिंगुतरगढ़ निवासी शिवपाल की बचपन से ही खेलों में बहुत रुचि थी। एयर फोर्स के जवान शिवपाल ने शिक्षा के साथ अपनी मेहनत के बल पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। साउथ एशियन गेम्स नेपाल काठमांडू में 84 मीटर व एशियन चैंपियनशिप में 86.48 मीटर भाला फेंककर सेकेंड सिल्वर मेडल हासिल कर चुके हैं।
हिंगुतरगढ़ निवासी पीएसी के जवान रामाश्रय सिंह के बड़े पुत्र शिवपाल वर्ष 2018 में एशियन गेम्स, वर्ष 2019 में नेशनल फेडरेशन कप सहित ओपेन नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर चुके हैं। मंगलवार को 24 वर्षीय शिवपाल ने 85.47 मीटर दूर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक पहुंचे हैं। दूसरे नंबर पर फिनलैंड के टोनी रहे, जिन्होंने 80.14 मीटर दूर भाला फेंका।
अर्शदीप सिंह 75 मीटर भाला फेंक कर तीसरे स्थान पर रहे। शिवपाल नीरज चोपड़ा के बाद दूसरे जैवलिन थ्रोअर हैं जो ओलंपिक में जाएंगे। जैसे ही शिवपाल के ओलंपिक में शामिल होने की खबर मिली जिले भर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
हिंगुतरगढ़ में शिवपाल सिंह के घर पर कोई नहीं है, लेकिन आस पड़ोस के लोग अपने लाल की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे हैं। एथलीट प्रफुल्ल सिंह सहित जिले के खिलाड़ियों ने शिवपाल के ओलंपिक में शामिल होने के लिए शिवपाल को शुभकामनाएं दी है।
चाचा जगमोहन के साथ दिल्ली में शुरू की थी प्रैक्टिस
भारतीय नौ सेना में तैनात चाचा जगमोहन सिंह शिवपाल की लगन और रुचि देखकर को 13 साल की उम्र में ही उसे अपने साथ दिल्ली ले गए थे। वहां उसने पंडित जवाहर लाल नेहरू स्टेड़ियम में वर्ष 2010, 11 व 12 में प्रैक्टिस शुरू की। उसकी खेल प्रतिभा के दम पर वर्ष 2013 में शिवपाल को इंडियन एयर फोर्स की नौकरी मिल गई।