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शिवसूक्त से गूंजेगा नाटकोटम क्षेत्रम का शिवमंदिर
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नाटकोटम क्षेत्रम का शिव मंदिर शिवसूक्त के पाठ से गुंजायमान होगा। तीन दिवसीय महारुद्र यज्ञ के अनुष्ठान 22 से आरंभ होकर 24 जुलाई तक चलेंगे। दक्षिण भारत के ब्राह्मणों द्वारा समस्त अनुष्ठान पूर्ण कराया जाएगा। सिगरा स्थित नंदवनम परिसर में महारुद्र यज्ञ की तैयारियों को बृहस्पतिवार को अंतिम रूप दिया गया। आयोजन में दक्षिण भारत के पांच सौ से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे और 108 ब्राह्मण शिवसूक्त का पाठ करेेंगे।
नंदवनम परिसर में दक्षिण भारतीय पद्धति से मंडप बनाया गया है। मिट्टी, बांस और रंग बिरंगे कागजों से बनाए गए 108 स्तंभों के बीच नौ हवन कुंड निर्मित किए गए हैं। हवन कुंडों में अगले तीन दिनों में शिवसूक्त के मंत्रों से एक लाख आठ आहुतियां दी जाएंगी। पिल्लयारपेट्टी गणेश शिवाश्री डॉ. पिच्चई कुड़कर इस अनुष्ठान के मुख्य आचार्य होंगे। 108 कलशों में जल भरने के लिए दशाश्वमेध घाट से गंगा जल लाया गया है।
संस्था के सदस्य तन्नू तप्पन ने बताया कि 22 और 23 जुलाई को अनुष्ठान दो चरणों में होगा। प्रात: 09:30 से 12 बजे तक एवं शाम को 05 बजे से 07 बजे तक अनुष्ठान चलेगा। अनुष्ठान के दौरान पूजित कलशों को दक्षिण भारत से आए तीर्थयात्री सिर पर रख कर पदयात्रा करते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाएंगे। दोपहर बाद साढ़े तीन बजे सिगरा स्थित नंदवनम परिसर से काशी विश्वनाथ मंदिर तक कलश यात्रा का आयोजन होगा।
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नंदवनम परिसर में दक्षिण भारतीय पद्धति से मंडप बनाया गया है। मिट्टी, बांस और रंग बिरंगे कागजों से बनाए गए 108 स्तंभों के बीच नौ हवन कुंड निर्मित किए गए हैं। हवन कुंडों में अगले तीन दिनों में शिवसूक्त के मंत्रों से एक लाख आठ आहुतियां दी जाएंगी। पिल्लयारपेट्टी गणेश शिवाश्री डॉ. पिच्चई कुड़कर इस अनुष्ठान के मुख्य आचार्य होंगे। 108 कलशों में जल भरने के लिए दशाश्वमेध घाट से गंगा जल लाया गया है।
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संस्था के सदस्य तन्नू तप्पन ने बताया कि 22 और 23 जुलाई को अनुष्ठान दो चरणों में होगा। प्रात: 09:30 से 12 बजे तक एवं शाम को 05 बजे से 07 बजे तक अनुष्ठान चलेगा। अनुष्ठान के दौरान पूजित कलशों को दक्षिण भारत से आए तीर्थयात्री सिर पर रख कर पदयात्रा करते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाएंगे। दोपहर बाद साढ़े तीन बजे सिगरा स्थित नंदवनम परिसर से काशी विश्वनाथ मंदिर तक कलश यात्रा का आयोजन होगा।
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