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बाबा विश्वनाथ के विवाह के लिए शुरू हुई हल्दी-तेल की रस्म, चहुंओर गूंजे मंगलगीत 

Mon, 12 Feb 2018 12:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 12 Feb 2018 12:07 PM IST
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Shiv marriage function start in varanasi
बाबा को हल्दी लगाती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
पुरखों की परम्परा...विधि-विधान का बसेरा और इसके लिए मुनादी न ढिंढोरा। ऋतुराज बसंत के अंजोर यानि शुक्ल पक्ष में बाबा विश्वनाथ को तिलक चढ़ा तो फाल्गुन के अंधियारे यानि कृष्ण पक्ष में विवाह का मड़वा गड़ा। बाबा की महारात्रि से एक दिन पहले रविवार को शुभ मुहूर्त में हल्दी-तेल की रस्म शुरू हो गई।
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बाबा विश्वनाथ को दूध-दही, अबीर-चंदन, मलयगिरी का लेपन लगातीं महिलाएं हल्दी-तेल रस्म की गीत गुनगुना रही थीं। महंत आवास में रविवार को बाबा विश्वनाथ के हल्दी की रस्म शुरू हुई। पूरा आवास मंगल गीतों से गूंज उठा।
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इसके साथ ही काशी में शिव भक्तों ने महादेव के विवाहोत्सव मनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। देवों के देव महादेव की बारात तो पूरे नगर में निकलती है लेकिन मां गौरा संग उनके विवाह की साक्षात छवि तो पूरी काशी में एकमात्र महंत आवास पर ही देखने को मिलती है।
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत कुलपति तिवारी के रेडजोन स्थित आवास पर शिव-पार्वती की रजतचल प्रतिमाओं संग विवाह की रस्मों की शुरुआत हल्दी की रस्म के साथ की गई। पंचबदन प्रतिमा को वैदिक रीति से स्नान के बाद हल्दी की रस्म आरंभ हुई।

महंत आवास पर हरदी लगल महादेव जी के उतरल कुंवर पत हो, अम्मा महादेव जी के हरदी लगल गौरा मइया बरत हो...शिवपति बरत हो...। बाबा की हल्दी रस्म शिवरात्रि की शाम चार बजे तक रुक-रुककर चलता रहेगा। इसके पश्चात वैवाहिक रस्में आरंभ होती हैं। 

कभी बाबा ब्याहने चले, भस्मी रमाय के...

Shiv marriage function start in varanasi
गाए गए मंगलगीत - फोटो : अमर उजाला
महंत कुलपति तिवारी ने बताया कि विवाह के दिन बाघम्भरधारी, देह पर भस्मी रमाए बाबा का साज भी गजब होता है। धोती-पीताम्बर पहनेंगे, पगड़ी बांधेंगे और रुद्राक्ष की माला धारण कर दूल्हा बनेंगे तो माता पार्वती शादी का जोड़ा, चूड़ियों का रंग लाल गहरा और गहने सुनहरा पहन दुलहिन बनेंगी।

जब बाबा दूल्हा बनेंगे तो विवाह गीत भी हर कोने से फूटेंगे। कभी बाबा ब्याहने चले, भस्मी रमाय के ...पालकी सजाय के, तो कभी चले भोलेनाथ चले देवन के देव, देखो चले महादेव चले गौरा ब्याहने और चले भोलेनाथ चले ब्याह रचाने, गौरा मइया बाट निहारे हो।

तीन वैदिक ब्राह्मण बाबा का विवाह कराएंगे और सामवेद की ऋचाएं सस्वर गाएंगे। पूरी रात विवाह की रस्में होंगी और कन्यादान काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डा. कुलपति तिवारी करेंगे।
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