शिक्षामित्रों ने राज्य सरकार से लगाई गुहार, चौथे दिन भी जोरदार प्रदर्शन
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सुप्रीम कोर्ट के समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद से बहाली के लिए आंदोलनरत शिक्षा मित्रों ने शुक्रवार को वाराणसी बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर धरना दिया। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि वह इस फैसले के खिलाफ जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विंचार याचिका दाखिल करे।
साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समायोजित शिक्षकों और शिक्षामित्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उचित फैसला करे। बता दें कि बहाली के लिए शिक्षामित्र पिछले चार दिन से पूरे प्रदेश में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
इससे पहले गुरुवार को वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के जिलों से बड़ी तादाद में आए शिक्षामित्रों ने रवींद्रपुरी स्थित पीएम के संसदीय कार्यालय के समीप जबरदस्त धरना-प्रदर्शन किया। अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारे लगाए।
कहा, तमिलनाडु के पारंपरिक खेल जलीकट्टू की तरह अध्यादेश लाकर शिक्षामित्रों का भविष्य बचाया जाए। साढ़े पांच घंटे तक शिक्षामित्रों के जमावड़े से रवींद्रपुरी-लंका मार्ग पूरी तरह जाम रहा। धरना स्थल से जिले की सीमाओं तक पुलिस-प्रशासन की खासी मुस्तैदी के बावजूद शिक्षामित्रों के हुजूम से सड़कें पूरी तरह पैक रहीं।
हालांकि भीड़ को जगह-जगह रोकने की रणनीति के तहत भारीभरकम फोर्स के साथ कई स्थानों पर मजबूत बैरिकेडिंग कराई गई। साथ ही, कुछ मार्गों पर आवागमन रोक दिया गया। बाहर से आने वाले तमाम शिक्षामित्र जिले की सीमाओं पर ही रोक दिए गए।
भाजपा को याद दिलाया वादा
बावजूद इसके बड़ी तादाद में शिक्षामित्रों का हुजूम सुबह दस बजे तक कीनाराम आश्रम पहुंच गया। यहां से हजारों शिक्षामित्र शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पीएम के संसदीय कार्यालय की तरफ बढ़े।
बैरिकेडिंग कराकर पहले से मुस्तैद फोर्स ने कार्यालय से करीब तीन सौ मीटर पहले आचार्य रामचंद्र शुक्ल चौराहे पर ही उन्हें रोक दिया। नाराज शिक्षामित्र यहीं धरने पर बैठ गए। सुबह दस बजे से शाम 3:30 बजे तक चले विरोध प्रदर्शन में बड़ी तादाद में महिला शिक्षामित्र भी शामिल हुईं।
नेतृत्व कर रहे आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र दूबे ने कहा कि 1,72,000 शिक्षामित्रों का भविष्य बचाने के लिए सरकार अध्यादेश लाए।
याद दिलाया कि अपने संसदीय क्षेत्र में 18 सितंबर 2015 को डीरेका में मंच से पीएम ने कहा था कि शिक्षामित्रों के साथ अन्याय नहीं होगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के घोषणा पत्र में भी शिक्षामित्रों के भविष्य को सुरक्षित करने का वायदा किया गया था।