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षट्तिला एकादशी 7 को: जानें इस दिन तिल से क्यों होती है भगवान विष्णु की पूजा, कन्यादान से भी ज्यादा है व्रत का फल
Sat, 06 Feb 2021 11:16 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Sat, 06 Feb 2021 11:16 PM IST
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भगवान विष्णु
- फोटो : अमर उजाला
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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बेहद शुभ और सर्वश्रेष्ठ माना गया है। षटतिला एकादशी व्रत माघ महीने के कृष्णपक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर आती है। इस बार ये तिथि 7 फरवरी, रविवार को आ रही है। इस दिन काले तिल से भगवान विष्णु की पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन तिल का दान करने से जाने-अनजाने हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। साथ ही कई गुना पुण्य भी मिलता है।
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पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र बताते हैं कि षटतिला एकादशी पर शुभ मुहुर्त में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, दान-पुण्य व कथा का स्मरण करना श्रेष्ठत्तम माना गया है। षटतिला एकादशी के दिन सुबह 07:55 से 09:25 तक, सुबह 12:20 से दोपहर 01:05 तक, दोपहर 02:34 से 03:18 तक, शाम 06:05 से 06:30 तक श्रेष्ठ मुहूर्त है।
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व्रत का महत्व
एकादशी के दिन तिल का खास महत्व बताया गया है। स्नान, दान, भोजन, तर्पण व प्रसाद सभी में तिल का उपयोग किया जाता है। तिल स्नान, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का तर्पण, तिल का भोजन और तिल का ही दान करने के कारण षटतिला एकादशी कहलाती है।
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पुराणों में बताया गया है कि जितना पुण्य कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या और स्वर्ण दान करने के बाद मिलता है, उससे कहीं ज्यादा फल एकमात्र षटतिला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मिल जाता है।