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Navratri: भोर में मां ब्रह्मचारिणी को जगाया, पंचामृत से स्नान कराया; दुर्गा घाट की गलियों में भक्तों का तांता
Tue, 23 Sep 2025 01:55 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 23 Sep 2025 01:55 PM IST
सार
Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने मंगल कामना की।
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मां ब्रह्मचारिणी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के देवी ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा हुई। भोर में तीन बजे मंदिर के कपाट खुले औैर मां के विग्रह को पंचामृत स्नान कराया गया। विग्रह को फूल, आभूषण और वस्त्रों से सजाया गया। माता को श्रीसूक्त सुनाकर षोडशोपचार विधि से पूजन किया गया। आरती उतारने के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
मंगलवार को दुर्गा घाट स्थित मां ब्रह्मचारिणी के मंदिर में चार बजे से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु हाथ में नारियल, फल, फूल और माला लेकर कतारबद्ध होकर माता के दर्शन कर रहे थे। हर एक घंटे के बाद माता की आरती उतारी जा रही थी। माता के दर्शन के लिए दुर्गा घाट की गलियों में श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
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मंगलवार को दुर्गा घाट स्थित मां ब्रह्मचारिणी के मंदिर में चार बजे से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु हाथ में नारियल, फल, फूल और माला लेकर कतारबद्ध होकर माता के दर्शन कर रहे थे। हर एक घंटे के बाद माता की आरती उतारी जा रही थी। माता के दर्शन के लिए दुर्गा घाट की गलियों में श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
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कतार में खड़े विधायक नीलकंठ तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालु कालभैरव मंदिर होते हुए गलियों से होकर माता के मंदिर पहुंच रहे थे। विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने भी श्रद्धालुओं के साथ कतारबद्ध होकर मां ब्रह्मचारिणी का दर्शन पूजन किया। महंत राजेश्वर सागरकर ने बताया कि माता को उनका प्रिय भोग खीर अर्पण किया गया और खीर से हवन किया गया। रात में शयन आरती के बाद मंदिर बंद होने तक दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए थे।
मां कूष्मांडा का हुआ ब्रह्मचारिणी स्वरूप में शृंगार : दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा का ब्रह्मचारिणी स्वरूप में शृंगार किया गया। माता का मंदिर भोर में 2:30 बजे ही खुल गया। शृंगार और आरती के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुल गए। श्रद्धालुओं ने नवरात्र के दूसरे दिन मां कूष्मांडा के विग्रह में मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप के दर्शन किए। वहीं शहर के देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
इसे भी पढ़ें; Navratri 2025: ज्ञान, वैराग्य और ध्यान की अधिष्ठात्री हैं देवी ब्रह्मचारिणी, नवरात्र के दूसरे दिन हुई पूजन
मां कूष्मांडा का हुआ ब्रह्मचारिणी स्वरूप में शृंगार : दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा का ब्रह्मचारिणी स्वरूप में शृंगार किया गया। माता का मंदिर भोर में 2:30 बजे ही खुल गया। शृंगार और आरती के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुल गए। श्रद्धालुओं ने नवरात्र के दूसरे दिन मां कूष्मांडा के विग्रह में मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप के दर्शन किए। वहीं शहर के देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
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जगदंबा भवानी नाचें बाबा विश्वनाथ जी के अंगना...
मैया बेटा के घर बेटी बनके आजा..., जगदंबा भवानी नाचें बाबा विश्वनाथ जी के अंगना..., विंध्यवासिनी मैया का चमत्कार हो गया... की धुन पर श्री काशी विश्वनाथ धाम का प्रांगण झंकृत हो उठा। मंगलवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्र की द्वितीया तिथि पर नौ दिवसीय अनुष्ठान के तहत भजन संध्या का आयोजन हुआ।
इसे भी पढ़ें; Vindhyachal Dham: नवरात्र के दूसरे दिन विंध्य धाम में उमड़े भक्त, ब्रह्मचारिणी के रूप में मां ने दिए दर्शन
इससे पहले श्री काशी विश्वनाथ न्यास की तरफ से शृंगार सामग्री शक्ति स्वरूपा मां विशालाक्षी और ब्रह्मचारी मां को भेंट की गई। गीतकार कन्हैया दुबे केडी के लिखे गीत डॉ. अमलेश शुक्ला अमन ने नमोस्तुते मां नमोस्तुते जय जय दुर्गे नमस्तुते... प्रस्तुत किया। आस्था शुक्ला और बाल कलाकार यथार्थ दुबे ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई।
मंदिर के महंत बोले
मंदिर के महंत राजेश्वर सागरकर ने बताया कि" ब्रह्मचारिणी मां की उपासना एवं आराधना करने से भक्तों को अनेक प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती हैं, जैसे तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार इत्यादि की वृद्धि होती है। इनकी कृपा से भक्तों को सर्वत्र विजय की प्राप्ति होती है और जो बच्चे पढ़ने में कमजोर है उन्हें मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन मात्र से जीवन के सभी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होती है। जीवन की अनेक प्रकार की परेशानियां भी समाप्त हो जाती हैं"।
मैया बेटा के घर बेटी बनके आजा..., जगदंबा भवानी नाचें बाबा विश्वनाथ जी के अंगना..., विंध्यवासिनी मैया का चमत्कार हो गया... की धुन पर श्री काशी विश्वनाथ धाम का प्रांगण झंकृत हो उठा। मंगलवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्र की द्वितीया तिथि पर नौ दिवसीय अनुष्ठान के तहत भजन संध्या का आयोजन हुआ।
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मंदिर के महंत बोले
मंदिर के महंत राजेश्वर सागरकर ने बताया कि" ब्रह्मचारिणी मां की उपासना एवं आराधना करने से भक्तों को अनेक प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती हैं, जैसे तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार इत्यादि की वृद्धि होती है। इनकी कृपा से भक्तों को सर्वत्र विजय की प्राप्ति होती है और जो बच्चे पढ़ने में कमजोर है उन्हें मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन मात्र से जीवन के सभी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होती है। जीवन की अनेक प्रकार की परेशानियां भी समाप्त हो जाती हैं"।