पंचायत चुनाव में कोरोना ने छीनी जिंदगी: पत्नी का दर्द- बेटे को कैसे समझाएं, अब पापा से नहीं मिल सकते
कक्षराय प्राथमिक स्कूल के सहायक अध्यापक राजेश कुमार की कोरोना की चपेट में आने से एक मई को मौत हो गई थी। पत्नी ने बताया कि पंचायत चुनाव के लिए हुए प्रशिक्षण के बाद से ही तबीयत खराब होने लगी थी।
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वाराणसी के सेवापुरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कक्षराय के सहायक अध्यापक रहे राजेश कुमार का हालही में हुए पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमित होने के बाद एक मई को निधन हो गया था। आज उनके घर के हालात बहुत बदल चुके हैं। घर में मातम छाया हुआ है। उनकी पत्नी अनुपमा का खुद के साथ-साथ बच्चों को समझाना मुश्किल हो रहा है। तीन साल का बेटा रात को उठकर बैठ जाता है और पापा से मिलने का मन कर रहा है, यह कहकर रोने लगता है। ऐसे में अनुपमा भी खुद को रोने से नहीं रोक पाती हैं।
मूल रूप से जौनपुर निवासी शिक्षक राजेश कुमार अकेले ही बनारस में कमरा लेके के रहते थे। कोरोना काल में हुए पंचायत चुनाव के बाद एक मई को उनका निधन हो गया। वो अपने पीछे पत्नी व दो बेटों को अकेला छोड़ गए हैं। अनुपमा बताती हैं कि उनके पति आठ अप्रैल को पंचायत चुनाव का प्रशिक्षण लेने गए थे। ट्रेनिंग से लौटने के बाद ही रात को उनकी तबीयत खराब होने शुरू हो गई। बुखार आया तो उन्होंने रात में दवा ले ली।
तबीयत खराब होने के बाद भी उन्हें ड्यूटी पर बुलाया जाता था। 14 अप्रैल को जौनपुर में हुए पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। रात करीब 12 बजे ड्यूटी से आने के बाद जब तबीयत ठीक नहीं हुई तो 16 अप्रैल को उन्होंने जिला अस्पताल में कोविड टेस्ट कराया। इस दौरान भी वो दवा ले रहे थे, लेकिन तबीयत ठीक नहीं हुई, तब हम लोगों ने उन्हें स्थानीय निजी चिकित्सक के यहां दिखाया। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां दी और हम उन्हें घर ले आए।
18 को जब कोरोना की रिपोर्ट आई तो वो पॉजिटिव थे। 18 की रात 12 बजे के बाद उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो 19 की सुबह ही हम लोगों ने उन्हें जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में एडमिट कराया। पति को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए डॉक्टरों ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा था, लेकिन ऑक्सीजन लेवल लगातार घटता जा रहा था। आखिरकार 11 दिनों तक कोरोना से जंग लड़ते लड़ते एक मई को वो जिंदगी की जंग हार गए। डॉक्टरों ने जब उनके मरने की सूचना दी तो आखों के सामने अंधेरा छा गया, लगा जिंदगी खत्म हो गई, पंचायत चुनाव ने मेरे साथ मेरे बच्चों की खुशियां छीन ली।
बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता -
अनुपमा बताती हैं मेरा बड़ा बेटा 8 साल का और छोटा बेटा अभी सिर्फ 3 साल का है। अब पढ़ाने, लिखाने व काबिल बनाने की जिम्मेदारी समय से पहले उनके कंधों पर आ गई है। वह कहती है कि जब तक कोई सरकारी मदद व मृतक आश्रित के रूप में सरकारी नौकरी नहीं लगेगी, तब तक परिवार को आर्थिक संकट से भी गुजरना पड़ रहा है। इतनी छोटी उम्र में बच्चों को पिता का प्यार भी नसीब नहीं हो सका।
राजेश कुमार की पत्नी अनुपमा ने बताया कि मृतक आश्रित कोटे से विभाग में नौकरी के लिए आवेदन कर दिया है। मेरी योग्यता एमए व बीएड की है। इसलिए टीईटी उत्तीर्ण करने का समय मांगा है। विभाग की ओर से अभी इस पर कोई जवाब नहीं आया है।