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चीन के उत्पादों को तगड़ा झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 02 Nov 2016 02:24 AM IST
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chinese goods
- फोटो : chinese goods
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उड़ी हमले और सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर चीन के भारत विरोधी रुख के बाद शुरू हुए चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार से वाराणसी में 55 फीसदी कारोबार कम हो गया। ग्राहकों में दिवाली पर पहले की तरह चाइनीज उत्पादों की खरीदारी का ट्रेंड इस बार बहुत कम दिखा। कारोबारी कहते हैं, यदि चाइनीज उत्पादों के विकल्प के तौर पर सस्ते और आकर्षक स्वदेशी उत्पाद बाजार में उपलब्ध होते तो यह आंकड़ा और बड़ा होता।
चाइनीज उत्पादों के प्रमुख बाजार कोदई चौकी, पियरी, हड़हा सराय के कारोबारियों के मुताबिक दिवाली पर यहां चाइनीज उत्पादों का कारोबार करीब सौ करोड़ का होता रहा है लेकिन अबकी बार पटाखे, खिलौने, मूर्तियां और घर के सजावटी सामान आदि को मिलाकर 55 करोड़ से ज्यादा का झटका लगा है। रेट कम करने के बावजूद खरीदारों में रुचि नहीं जगी। तमाम ग्राहकों ने कीमत अधिक होने के बावजूद स्वदेशी विकल्पों को तरजीह दी। पिछले वर्षों में खरीदे गए चाइनीज झालर घरों, मकानों, दूकानों पर टंगे जरूर नजर आए लेकिन नए माल की बिक्री बहुत कम हुई।
एक तरफ मीडिया, सोशल मीडिया और सामाजिक संगठनों की बहिष्कार की अपील तो दूसरी तरफ व्यापारियों की चाइनीज सामान न बेचने की शपथ। इस कारण दिवाली पर झालर हों, पटाखे हों या खिलौने, सब में स्वदेशी का रंग नजर आया। चाइनीज सामान के बहिष्कार के बाद अब मोबाइल पर चाइनीज एप्लीकेशन का भी विरोध शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर लगातार संदेश वायरल हो रहे हैं कि मोबाइल पर चाइनीज एप्लीकेशन यूसी ब्राउजर को डाउनलोड नहीं करो, पहले कर लिया है तो अब अनइंस्टाल कर दो।
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दिवाली पर तगड़ा झटका लगने के बाद चाइनीज उत्पादों के कारोबारी सतर्क हो गए हैं। खासकर होली के लिए ऑर्डर मंगाने से पहले वह ग्राहकों और बाजार का रुख भांप लेना चाहते हैं। उन्हें चिंता है कि कहीं चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम और तेज हुई तो होली पर कारोबार को और बड़ा झटका लग सकता है। बता दें कि होली पर पिचकारी, रंग, मुखौटे, टोपी आदि का करोड़ों का कारोबार होता है।
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चाइनीज उत्पादों के प्रमुख बाजार कोदई चौकी, पियरी, हड़हा सराय के कारोबारियों के मुताबिक दिवाली पर यहां चाइनीज उत्पादों का कारोबार करीब सौ करोड़ का होता रहा है लेकिन अबकी बार पटाखे, खिलौने, मूर्तियां और घर के सजावटी सामान आदि को मिलाकर 55 करोड़ से ज्यादा का झटका लगा है। रेट कम करने के बावजूद खरीदारों में रुचि नहीं जगी। तमाम ग्राहकों ने कीमत अधिक होने के बावजूद स्वदेशी विकल्पों को तरजीह दी। पिछले वर्षों में खरीदे गए चाइनीज झालर घरों, मकानों, दूकानों पर टंगे जरूर नजर आए लेकिन नए माल की बिक्री बहुत कम हुई।
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एक तरफ मीडिया, सोशल मीडिया और सामाजिक संगठनों की बहिष्कार की अपील तो दूसरी तरफ व्यापारियों की चाइनीज सामान न बेचने की शपथ। इस कारण दिवाली पर झालर हों, पटाखे हों या खिलौने, सब में स्वदेशी का रंग नजर आया। चाइनीज सामान के बहिष्कार के बाद अब मोबाइल पर चाइनीज एप्लीकेशन का भी विरोध शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर लगातार संदेश वायरल हो रहे हैं कि मोबाइल पर चाइनीज एप्लीकेशन यूसी ब्राउजर को डाउनलोड नहीं करो, पहले कर लिया है तो अब अनइंस्टाल कर दो।
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दिवाली पर तगड़ा झटका लगने के बाद चाइनीज उत्पादों के कारोबारी सतर्क हो गए हैं। खासकर होली के लिए ऑर्डर मंगाने से पहले वह ग्राहकों और बाजार का रुख भांप लेना चाहते हैं। उन्हें चिंता है कि कहीं चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम और तेज हुई तो होली पर कारोबार को और बड़ा झटका लग सकता है। बता दें कि होली पर पिचकारी, रंग, मुखौटे, टोपी आदि का करोड़ों का कारोबार होता है।