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अल्लाह की मदद तादाद की मोहताज नहीं, दो दिवसीय सीरत कांफ्रें स का हुआ समापन
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दारुल उलूम देवबंद के कुलपति मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि हमें अपनी जिंदगी में सब्र और तकवा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। मौजूदा हालात में हमें न तो बुजदिल बनकर मायूस हो जाना है और न ही मुशतइल होना है बल्कि होशमंदी के साथ संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए अपने तमाम जायज हुकूक हासिल करना है।
अल्लाह की मदद तादाद की मोहताज नहीं है, मुसलमान हमेशा से से तादाद में कम रहा है। उन्होंने कहा कि अल्लाह की मदद का ताल्लुक हमारे आमाल से है। शुक्रवार को जमीयत उलमा ए बनारस के तत्वावधान में पुराना पुल बड़ी ईदगाह के विशाल मैदान में दो दिवसीय सीरत कांफ्रेंस के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मौलाना सलमान बिजनौरी ने सुन्नत की अहमियत को बयान करते हुए कहा कि हमें अपनी जिंदगी के हर शोबे में सुन्नत की पाबंदी करनी चाहिए। मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सलमान मंसूरपुरी ने कहा कि मुहम्मद की जिंदगी और आप का तरीका कयामत तक आने वाले इंसानों के लिए नमूना है और यही दोनों जहान की कामयाबी का राज है। बताया कि न सिर्फ मुसलमान बल्कि पूरी दुनिया के इंसान मुहम्मद साहब की सियासी, समाजी और निजी जिंदगी को अपना लें तो पूरी दुनिया में फैला हुआ बेसकूनी का माहौल खत्म हो जाएगा।
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अंत में जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी सैयद मुहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने कहा कि जमीयत कोई राजनीतिक संस्था नहीं है बल्कि इसका सारा काम दीन का काम है। नबी ने फरमाया है कि जो आदमी प्रशासनिक अधिकारियों तक ऐसे लोगों की फरियाद पहुंचा दे जो खुद वहां तक न जा सके तो अल्लाह तआला महशर में पुल सेरात पर उसके कदम को जमा देगा। जलसे का आगाज कारी फैयाजुद्दीन कासमी की तिलावत से हुआ। कारी अहमद अब्दुल्लाह ने नात पाक का नजराना पेश किया। कार्यक्रम का संचालन अब्दुल मोईद कासमी ने किया। रिपोर्ट मौलाना अबू शहमा नोमानी ने पेश की।
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अल्लाह की मदद तादाद की मोहताज नहीं है, मुसलमान हमेशा से से तादाद में कम रहा है। उन्होंने कहा कि अल्लाह की मदद का ताल्लुक हमारे आमाल से है। शुक्रवार को जमीयत उलमा ए बनारस के तत्वावधान में पुराना पुल बड़ी ईदगाह के विशाल मैदान में दो दिवसीय सीरत कांफ्रेंस के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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मौलाना सलमान बिजनौरी ने सुन्नत की अहमियत को बयान करते हुए कहा कि हमें अपनी जिंदगी के हर शोबे में सुन्नत की पाबंदी करनी चाहिए। मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सलमान मंसूरपुरी ने कहा कि मुहम्मद की जिंदगी और आप का तरीका कयामत तक आने वाले इंसानों के लिए नमूना है और यही दोनों जहान की कामयाबी का राज है। बताया कि न सिर्फ मुसलमान बल्कि पूरी दुनिया के इंसान मुहम्मद साहब की सियासी, समाजी और निजी जिंदगी को अपना लें तो पूरी दुनिया में फैला हुआ बेसकूनी का माहौल खत्म हो जाएगा।
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अंत में जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी सैयद मुहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने कहा कि जमीयत कोई राजनीतिक संस्था नहीं है बल्कि इसका सारा काम दीन का काम है। नबी ने फरमाया है कि जो आदमी प्रशासनिक अधिकारियों तक ऐसे लोगों की फरियाद पहुंचा दे जो खुद वहां तक न जा सके तो अल्लाह तआला महशर में पुल सेरात पर उसके कदम को जमा देगा। जलसे का आगाज कारी फैयाजुद्दीन कासमी की तिलावत से हुआ। कारी अहमद अब्दुल्लाह ने नात पाक का नजराना पेश किया। कार्यक्रम का संचालन अब्दुल मोईद कासमी ने किया। रिपोर्ट मौलाना अबू शहमा नोमानी ने पेश की।