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UP: काशी में 9.50 करोड़ रुपये से बने 62 स्कल्पचर, दो टूटकर झुकने लगे; देश प्रेम के स्कल्पचर की उखड़ रही फर्श

Tue, 09 Sep 2025 02:45 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 09 Sep 2025 02:45 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी जिले के फुलवरिया में देश प्रेम का स्कल्पचर जिस पत्थर पर रखा गया है, वहां की फर्श उखड़ रही है। उसमें दरारें आ गई हैं। वहीं रामनगर में लस्सीवाले स्कल्पचर के पैर में दरार आ गया है। 

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Sculptures installed in Varanasi city have started bending with cracks
रामनगर में शास्त्री चौराहे पर लगा लस्सीवाले का स्कल्पचर व क्षतिग्रस्त स्कल्पचर - फोटो : रोहित सोनकर

विस्तार

वाराणसी शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाए जा रहे स्कल्पचर दरार के साथ झुकने लगे हैं। रामनगर में लस्सीवाला और फुलवरिया में देश प्रेम के स्कल्पचर को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। यह कार्य संस्कृति विभाग, वीडीए, बरेका मिलकर करा रहे हैं। 

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9.5 करोड़ रुपये की लागत से 62 स्थानों पर स्कल्पचर लगाए जा रहे हैं। फुलवरिया में देश प्रेम का स्कल्पचर जिस पत्थर पर रखा गया है, वहां की फर्श उखड़ रही है। उसमें दरारें आ गई हैं। स्कल्पचर का एक हाथ धीरे-धीरे झुक रहा है जबकि दूसरे हाथ की हथेली नहीं है। इसके आसपास काफी गंदगी है। जिसकी साफ सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 
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रामनगर में लस्सीवाला स्कल्पचर के पैर में दरार होने के कारण एक ओर झुक रहा है। इन स्कल्पचर के बारे में पूरी जानकारी बोर्ड पर लिखी है। जिस पर रेलवे और वीडीए का लोगो लगा हुआ है। वीडीए के एक अधिकारी ने बताया कि स्कल्पचर का काम पूरा नहीं हुआ है। यह अभी अंडर कंस्ट्रक्शन है। इंस्टालेशन का काम चल रहा है। 
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ज्यादातर बनारस के कार्यशाला में और कुछ बाहर से स्कल्पचर मंगाए जा रहे हैं। काम पूरा होने के बाद सब ठीक हो जाएगा। स्कल्चर से न केवल काशी की सुंदरता निखरेगी बल्कि शहर के सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को भी उजागर करेगी। 

इन स्कल्पचर के माध्यम से कबाड़ को कला का रूप देकर पुनः उपयोग में लाने की प्रेरणा मिलेगी। इसके तहत 62 स्कल्पचर शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे। इनमें से 35 लगाए जा चुके हैं। बाकी बचे 27 स्कल्पचर जल्द लगाए जाएंगे। इसकी मंशा है कि शहर के सड़कों, चौराहों, प्रमुख स्थानों पर इन स्कल्पचर के जरिये स्थानीय पहचान को कलात्मक स्वरूप दिया जाए। ये कलाकृतियां स्क्रैप से तैयार की गई हैं।  

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