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ट्रेन से स्कूल वैन की टक्कर साजिश तो नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 29 Jul 2016 02:23 AM IST
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भदोही में ट्रेन दुर्घटना के बाद पलटा मैजिक
- फोटो : ब्यूरो/ वाराणसी
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भदोही के कैयरमऊ स्थित 28सी मानवरहित क्रॉसिंग पर स्कूल वैन के ट्रेन से टकराने के बाद आठ बच्चों की मौत और नौ के घायल होने की घटना की छानबीन में सामने आए तथ्य हैरान कर देने वाले हैं। पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से इस घटना की जांच के लिए गठित टीम के समक्ष कैयरमऊ के जिन पांच चश्मदीदों सहित आठ लोगों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं, उन्होंने साफ कहा है कि वैन चालक ने जानबूझकर बच्चों को काल के हवाले किया है। सभी लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई गई है।
गुरुवार को पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल कार्यालय पर इन सभी चश्मदीदों को बयान देने के लिए लाया गया था। वरिष्ठ मंडल इंजीनियर तृतीय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी के समक्ष कैयरमऊ के पांच ग्रामीणाें के अलावा गेट मित्र, ट्रेन के पायलट और गार्ड के लिखित और मौखिक बयान दर्ज किए गए। सूत्रों के मुताबिक चश्मदीदों ने अपने बयान में यह भी बताया है कि जब स्कूल वाहन रेल पटरी पर पहुंचा तो उसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि स्कूल वैन का चालक रोजाना गेट के उत्तर दिशा की ओर के बच्चों को वापसी में बैठाता था लेकिन हादसे वाले दिन उसने उन चार बच्चों को पहले ही बैठा लिया, जो गेट के इस पार थे।
यह भी बताया कि चालक जब वैन लेकर क्रॉसिंग के पास पहुंचा तो वहां ट्रेन के गुजरने के इंतजार में एक अन्य स्कूल का वाहन पहले से ही खड़ा था। गेट मित्र के साथ दूसरे वाहन के चालक और वहां मौजूद अन्य लोगों ने भी उसे रोकने के लिए हल्ला-गुहार मचाई थी लेकिन उसने किसी की सुनी नहीं और वाहन लेकर पटरी पर पहुंच गया था। इस बीच रेलवे अधिकारियों ने फिलहाल रोके जाने के बावजूद वैन को ट्रैक पर ले जाने की बात स्वीकार की है। साजिश के आरोपों के बारे में कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। हालांकि सूत्रों के मुताबिक बयान देने वालों के साजिश संबंधी पहलू पर भी जांच के दौरान गौर किया जाएगा। बयान दर्ज कराने वाले चश्मदीद गवाहों में मोहन सिंह, ओम प्रकाश मिश्रा, विशाल चंद्र, धन्नी राम मिश्रा, अवधेश उर्फ नीरज सरोज शामिल रहे।
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गुरुवार को पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल कार्यालय पर इन सभी चश्मदीदों को बयान देने के लिए लाया गया था। वरिष्ठ मंडल इंजीनियर तृतीय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी के समक्ष कैयरमऊ के पांच ग्रामीणाें के अलावा गेट मित्र, ट्रेन के पायलट और गार्ड के लिखित और मौखिक बयान दर्ज किए गए। सूत्रों के मुताबिक चश्मदीदों ने अपने बयान में यह भी बताया है कि जब स्कूल वाहन रेल पटरी पर पहुंचा तो उसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि स्कूल वैन का चालक रोजाना गेट के उत्तर दिशा की ओर के बच्चों को वापसी में बैठाता था लेकिन हादसे वाले दिन उसने उन चार बच्चों को पहले ही बैठा लिया, जो गेट के इस पार थे।
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यह भी बताया कि चालक जब वैन लेकर क्रॉसिंग के पास पहुंचा तो वहां ट्रेन के गुजरने के इंतजार में एक अन्य स्कूल का वाहन पहले से ही खड़ा था। गेट मित्र के साथ दूसरे वाहन के चालक और वहां मौजूद अन्य लोगों ने भी उसे रोकने के लिए हल्ला-गुहार मचाई थी लेकिन उसने किसी की सुनी नहीं और वाहन लेकर पटरी पर पहुंच गया था। इस बीच रेलवे अधिकारियों ने फिलहाल रोके जाने के बावजूद वैन को ट्रैक पर ले जाने की बात स्वीकार की है। साजिश के आरोपों के बारे में कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। हालांकि सूत्रों के मुताबिक बयान देने वालों के साजिश संबंधी पहलू पर भी जांच के दौरान गौर किया जाएगा। बयान दर्ज कराने वाले चश्मदीद गवाहों में मोहन सिंह, ओम प्रकाश मिश्रा, विशाल चंद्र, धन्नी राम मिश्रा, अवधेश उर्फ नीरज सरोज शामिल रहे।
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