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पूर्व माध्यमिक विद्यालय में लगा ‘सीटें फुल’ का बोर्ड
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वाराणसी। शहर के कई परिषदीय स्कूल बच्चों के लिए तरस रहे हैं, वहीं सेवापुरी ब्लाक का पूर्व माध्यमिक विद्यालय ठठरा जिले का पहला ऐसा पूर्व माध्यमिक विद्यालय है, जहां सीटें फुल का बोर्ड लग गया है। हालांकि यह उपलब्धि यूं ही हासिल नहीं हुई है। विद्यालय के विकास के लिए शिक्षकों ने अपनी सैलरी तक दान कर दी है।
प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने अपनी सैलरी से दो कक्षाओं में 65-70 हजार की लागत से टाइल्स लगवाए और शौचालय का निर्माण पूरा करवाया। 35,000 की लागत से वॉल पेंटिंग कराई गई। यहां स्मार्ट क्लास रूम हैं। हरा-भरा परिसर और कमरों में सीसीटीवी कैमरे और टाइल्स लगे है। ब्रिक्स बिछा परिसर है तो इनवर्टर, आरओ और प्रोजेक्टर जैसी जरूरी चीजें भी हैं। हिंदी माध्यम के इस स्कूल में 299 लड़के और 288 छात्राएं नामांकित हैं। विद्यालय के कायाकल्प को देखकर महानिदेशक ने इस विद्यालय के शिक्षकों की सराहना की है।
डाइनिंग टेबल पर मिड डे मील
बच्चों को मिड डे मील के लिए सीमेंटेड डाइनिंग टेबल, पीने के पानी के लिए आरओ और वाटर कूलर की व्यवस्था की गई है। सभी जगह रनिंग वाटर की व्यवस्था है। पार्क, झूला से सुसज्जित इस विद्यालय में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग मॉडल शौचालय हैं।
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राष्ट्रीय आविष्कार पुरस्कार में चयनित हुए छात्र
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बदौलत विद्यालय से प्रतिवर्ष 10 से 15 बच्चे योग्यता आधारित राष्ट्रीय परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो चुके हैं। राष्ट्रीय आविष्कार पुरस्कार के अंतर्गत स्कूल के बच्चे एक्सपोजर विजिट पर प्रयागराज व पटना भी जा चुके हैं। विद्यालय को सरकार की ओर से स्टूडेंट पुलिस कैडेट कार्यक्रम के लिए भी चयनित किया गया है।
सोशल मीडिया पर भी प्रचार प्रसार
स्कूल में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने गांव-गांव जाकर पोस्टर, बैनर और पंपलेट के साथ ही सोशल मीडिया पर विद्यालय की विशेषताएं बताईं। विद्यालय की फोटो और वीडियो अपलोड किए गए।
2009 से हुई बदलाव की शुरुआत
विद्यालय में बदलाव की शुरुआत साल 2009 में प्रधानाध्यापक चंद्रबली पटेल के बतौर सहायक अध्यापक कार्यभार संभालने के बाद ही शुरू हो गई थी। साल 2017 में जब चंद्रबाली ने प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यभार संभाला तो शिक्षकों के साथ मिलकर विद्यालय का स्वरूप बदलना शुरू किया। गांव के प्रधान प्रतिनिधि व पूर्व ग्राम प्रधान सियाराम केशरी से भी मदद ली। विद्यालय में 17 सहायक अध्यापक, 3 अनुदेशक व एक परिचारक कार्यरत है।
विद्यालय के कायाकल्प में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक संग ग्राम प्रधानों का सहयोग सराहनीय है। सरकार की मंशा के अनुरूप सरकारी स्कूल के शिक्षक अब नए कलेवर में बच्चों को शिक्षा देने में जुटे है। विद्यालय में सीटों के सापेक्ष एडमिशन पूरे हो गए हैं। -राकेश सिंह, बीएसए
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प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने अपनी सैलरी से दो कक्षाओं में 65-70 हजार की लागत से टाइल्स लगवाए और शौचालय का निर्माण पूरा करवाया। 35,000 की लागत से वॉल पेंटिंग कराई गई। यहां स्मार्ट क्लास रूम हैं। हरा-भरा परिसर और कमरों में सीसीटीवी कैमरे और टाइल्स लगे है। ब्रिक्स बिछा परिसर है तो इनवर्टर, आरओ और प्रोजेक्टर जैसी जरूरी चीजें भी हैं। हिंदी माध्यम के इस स्कूल में 299 लड़के और 288 छात्राएं नामांकित हैं। विद्यालय के कायाकल्प को देखकर महानिदेशक ने इस विद्यालय के शिक्षकों की सराहना की है।
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डाइनिंग टेबल पर मिड डे मील
बच्चों को मिड डे मील के लिए सीमेंटेड डाइनिंग टेबल, पीने के पानी के लिए आरओ और वाटर कूलर की व्यवस्था की गई है। सभी जगह रनिंग वाटर की व्यवस्था है। पार्क, झूला से सुसज्जित इस विद्यालय में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग मॉडल शौचालय हैं।
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राष्ट्रीय आविष्कार पुरस्कार में चयनित हुए छात्र
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बदौलत विद्यालय से प्रतिवर्ष 10 से 15 बच्चे योग्यता आधारित राष्ट्रीय परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो चुके हैं। राष्ट्रीय आविष्कार पुरस्कार के अंतर्गत स्कूल के बच्चे एक्सपोजर विजिट पर प्रयागराज व पटना भी जा चुके हैं। विद्यालय को सरकार की ओर से स्टूडेंट पुलिस कैडेट कार्यक्रम के लिए भी चयनित किया गया है।
सोशल मीडिया पर भी प्रचार प्रसार
स्कूल में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने गांव-गांव जाकर पोस्टर, बैनर और पंपलेट के साथ ही सोशल मीडिया पर विद्यालय की विशेषताएं बताईं। विद्यालय की फोटो और वीडियो अपलोड किए गए।
2009 से हुई बदलाव की शुरुआत
विद्यालय में बदलाव की शुरुआत साल 2009 में प्रधानाध्यापक चंद्रबली पटेल के बतौर सहायक अध्यापक कार्यभार संभालने के बाद ही शुरू हो गई थी। साल 2017 में जब चंद्रबाली ने प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यभार संभाला तो शिक्षकों के साथ मिलकर विद्यालय का स्वरूप बदलना शुरू किया। गांव के प्रधान प्रतिनिधि व पूर्व ग्राम प्रधान सियाराम केशरी से भी मदद ली। विद्यालय में 17 सहायक अध्यापक, 3 अनुदेशक व एक परिचारक कार्यरत है।
विद्यालय के कायाकल्प में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक संग ग्राम प्रधानों का सहयोग सराहनीय है। सरकार की मंशा के अनुरूप सरकारी स्कूल के शिक्षक अब नए कलेवर में बच्चों को शिक्षा देने में जुटे है। विद्यालय में सीटों के सापेक्ष एडमिशन पूरे हो गए हैं। -राकेश सिंह, बीएसए