{"_id":"5f57dbc08ebc3e44a7283dce","slug":"school-city-news-vns546145985","type":"story","status":"publish","title_hn":"विद्यालय की बगिया के बागबान बनेंगे बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विद्यालय की बगिया के बागबान बनेंगे बच्चे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। स्कूल हो या आंगनबाड़ी केंद्र यहां आने वाले बच्चों की सेहत ठीक रहे इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। स्कूल की खाली पड़ी जमीन हो या फिर छत, गुरुजी बच्चों को हरी सब्जियां व साग खिलाने के लिए अब सेहत के लिए लाभदायक बगिया तैयार करेंगे। इस पर आने वाला खर्च बेसिक शिक्षा विभाग के अलावा मनरेगा व राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से उठाया जाएगा।
सब्जियों की सिंचाई के लिए रसोईया के अलावा छात्रों का भी समूह बनाकर जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके तहत जिले के 400 विद्यालयों को शामिल किया जाएगा। जिसका चयन विभाग द्वारा जल्द शुरू होने वाला है।
फल व सब्जियों का चयन
सब्जियों और फलों का चयन जलवायु की परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा। वहीं इन सब्जियों को तैयार करने के लिए वाटिका के आखिरी छोर पर दो खाद के गड्ढे बनाकर जैविक कचरे का उपयोग खाद के लिए होगा। बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय के प्रधानाध्यापक किचन गार्डन विकसित करने के लिए विद्यालय परिसर में उपलब्ध जमीन का चयन करेंगे। शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में पर्याप्त जमीन ना होने की स्थिति में छतों या अन्य स्थानों पर गमले मटके बोरे व जूट के थैले में सब्जियां उगाई जा सकती हैं। सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल ना होने की स्थिति में फेंसिंग का कार्य कराया जाएगा।
विज्ञापन
सीजन के अनुसार लुगाई जाएंगी सब्जियां
खरीफ में चौरई का साग, भिंडी, बैगन, करेला, तोरई, कद्दू, लौकी, प्याज व सेम
रबी सीजन में टमाटर, मटर, मिर्च, पता गोभी, फूल गोभी, पालक, सरसों, मेंथी, सोया, धनिया व बथुआ आदि उगाया जाएगा।
विज्ञापन
सब्जियों की सिंचाई के लिए रसोईया के अलावा छात्रों का भी समूह बनाकर जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके तहत जिले के 400 विद्यालयों को शामिल किया जाएगा। जिसका चयन विभाग द्वारा जल्द शुरू होने वाला है।
विज्ञापन
फल व सब्जियों का चयन
सब्जियों और फलों का चयन जलवायु की परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा। वहीं इन सब्जियों को तैयार करने के लिए वाटिका के आखिरी छोर पर दो खाद के गड्ढे बनाकर जैविक कचरे का उपयोग खाद के लिए होगा। बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय के प्रधानाध्यापक किचन गार्डन विकसित करने के लिए विद्यालय परिसर में उपलब्ध जमीन का चयन करेंगे। शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में पर्याप्त जमीन ना होने की स्थिति में छतों या अन्य स्थानों पर गमले मटके बोरे व जूट के थैले में सब्जियां उगाई जा सकती हैं। सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल ना होने की स्थिति में फेंसिंग का कार्य कराया जाएगा।
विज्ञापन
सीजन के अनुसार लुगाई जाएंगी सब्जियां
खरीफ में चौरई का साग, भिंडी, बैगन, करेला, तोरई, कद्दू, लौकी, प्याज व सेम
रबी सीजन में टमाटर, मटर, मिर्च, पता गोभी, फूल गोभी, पालक, सरसों, मेंथी, सोया, धनिया व बथुआ आदि उगाया जाएगा।