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Varanasi News: स्कूली बच्चे आईआईटी बीएचयू से सीख रहे भारत की पांडुलिपि विरासत का संरक्षण
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आईआईटी बीएचयू के देव एवं वर्धना गोस्वामी हॉल में मंगलवार को भारत की पांडुलिपीय विरासत विषय पर दो दिन कार्यशाला का शुरू हुई। कक्षा छह से आठ तक के 70 छात्र-छात्राओं को बीएचयू की सेंट्रल लाइब्रेरी का भ्रमण कराया गया। मानवतावादी अध्ययन विभाग की ओर से मुख्य अतिथि सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. गोपबंधु मिश्रा और विशिष्ट अतिथि आदित्य विक्रम अग्रवाल मौजूद रहे।
संयोजिका प्रो. विनिता चंद्रा ने बताया कि इस कार्यशाला में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों में पांडुलिपीय विरासत के प्रति जागरूकता पैदा किया गया। उन्हें इसके संरक्षण और अध्ययन से जुड़े बुनियादी कौशलों से परिचित कराया गया और पांडुलिपि-विज्ञान के क्षेत्र में संभावित करियर अवसरों से अवगत कराया जा रहा है। प्रो. गोपबंधु मिश्रा ने बताया कि श्रुत और श्राव्य परंपरा से जुड़े शब्दों को लिपि के माध्यम से दृश्य रूप दिया गया। वहीं, आदित्य विक्रम अग्रवाल ने अपनी पांडुलिपियों के माध्यम से व्यापारिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन की बात कही। विभागाध्यक्ष प्रो. पीके पंडा ने अध्यक्षीय संबोधन में अभिलेख (रिकॉर्ड) रखने की बढ़ती आवश्यकता और उससे पांडुलिपि संस्कृति के विकास की प्रक्रिया को बताया।
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संयोजिका प्रो. विनिता चंद्रा ने बताया कि इस कार्यशाला में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों में पांडुलिपीय विरासत के प्रति जागरूकता पैदा किया गया। उन्हें इसके संरक्षण और अध्ययन से जुड़े बुनियादी कौशलों से परिचित कराया गया और पांडुलिपि-विज्ञान के क्षेत्र में संभावित करियर अवसरों से अवगत कराया जा रहा है। प्रो. गोपबंधु मिश्रा ने बताया कि श्रुत और श्राव्य परंपरा से जुड़े शब्दों को लिपि के माध्यम से दृश्य रूप दिया गया। वहीं, आदित्य विक्रम अग्रवाल ने अपनी पांडुलिपियों के माध्यम से व्यापारिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन की बात कही। विभागाध्यक्ष प्रो. पीके पंडा ने अध्यक्षीय संबोधन में अभिलेख (रिकॉर्ड) रखने की बढ़ती आवश्यकता और उससे पांडुलिपि संस्कृति के विकास की प्रक्रिया को बताया।
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