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कागजों में फिट, सड़कों पर दौड़ रही सैकड़ों अनफिट स्कूली बसें
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कागजों में फिट, सड़कों पर दौड़ रही सैकड़ों अनफिट स्कूली बसें
न्यायालय के दो मार्च तक स्कूली बसों के फिटनेस टेस्ट के आदेश के बाद आरटीओ में हड़कंप
बड़े पैमाने पर सामने आ सकती हैं खामियां, मानकों को ताक पर रख किया गया है फिटनेस
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण वाराणसी में सैकड़ों स्कूली बसों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। मगर, सड़कों पर अनफिट होने के कारण हादसों की आशंका बनी रहती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दो मार्च तक सभी जिलाधिकारियों को स्कूली बसों का फिटनेस टेस्ट का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। उधर, मजिस्ट्रेट की निगरानी में होने वाले फिटनेस टेस्ट में बड़े पैमाने पर खामियां सामने आने की संभावना है।
पिछले दिनों परिवहन विभाग ने निजी स्कूल को लाभ पहुंचाने के लिए एसी बसों का नॉन एसी में पंजीकरण कर दिया था। इतना ही नहीं चेचिस पर ही स्कूल बस का फिटनेस प्रमाण पत्र भी जारी किया था। इस मामले में पंजीकरण लिपिक का तबादला भी किया गया। मगर, स्कूली बसों के मानकों को ताक पर रखकर फिटनेस जारी करने की शिकायतें अक्सर आती हैं। जबकि इसके लिए गाइड लाइन जारी की गई है। वाराणसी में तीन हजार से ज्यादा स्कूली बसें हैं और इनमें आधे से ज्यादा अनफिट वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया गया है। नियमों के अनुसार वाहन स्कूल के नाम पर रजिस्टर होना चाहिए। यदि किसी एजेंसी से अनुबंध पर वाहन लिया गया हो तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। बस पीले रंग की होनी चाहिए, जिस पर ब्राउन या नीले रंग की पट्टी होनी चाहिए। बस के खिड़कियों पर बाहर की ओर से रॉड लगा होना चाहिए। बस 15 साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही वाहनों का हर साल फिजिकल टेस्ट कराना चाहिए। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने बताया कि स्कूली बसों के फिटनेस की जांच मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराई जाती है। इस मामले में किसी तरह का निर्देश मिलता है तो अभियान के रूप में फिटनेस टेस्ट कराया जाएगा।
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न्यायालय के दो मार्च तक स्कूली बसों के फिटनेस टेस्ट के आदेश के बाद आरटीओ में हड़कंप
बड़े पैमाने पर सामने आ सकती हैं खामियां, मानकों को ताक पर रख किया गया है फिटनेस
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण वाराणसी में सैकड़ों स्कूली बसों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। मगर, सड़कों पर अनफिट होने के कारण हादसों की आशंका बनी रहती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दो मार्च तक सभी जिलाधिकारियों को स्कूली बसों का फिटनेस टेस्ट का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। उधर, मजिस्ट्रेट की निगरानी में होने वाले फिटनेस टेस्ट में बड़े पैमाने पर खामियां सामने आने की संभावना है।
पिछले दिनों परिवहन विभाग ने निजी स्कूल को लाभ पहुंचाने के लिए एसी बसों का नॉन एसी में पंजीकरण कर दिया था। इतना ही नहीं चेचिस पर ही स्कूल बस का फिटनेस प्रमाण पत्र भी जारी किया था। इस मामले में पंजीकरण लिपिक का तबादला भी किया गया। मगर, स्कूली बसों के मानकों को ताक पर रखकर फिटनेस जारी करने की शिकायतें अक्सर आती हैं। जबकि इसके लिए गाइड लाइन जारी की गई है। वाराणसी में तीन हजार से ज्यादा स्कूली बसें हैं और इनमें आधे से ज्यादा अनफिट वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया गया है। नियमों के अनुसार वाहन स्कूल के नाम पर रजिस्टर होना चाहिए। यदि किसी एजेंसी से अनुबंध पर वाहन लिया गया हो तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। बस पीले रंग की होनी चाहिए, जिस पर ब्राउन या नीले रंग की पट्टी होनी चाहिए। बस के खिड़कियों पर बाहर की ओर से रॉड लगा होना चाहिए। बस 15 साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही वाहनों का हर साल फिजिकल टेस्ट कराना चाहिए। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने बताया कि स्कूली बसों के फिटनेस की जांच मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराई जाती है। इस मामले में किसी तरह का निर्देश मिलता है तो अभियान के रूप में फिटनेस टेस्ट कराया जाएगा।
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