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Varanasi News: एसबीआई का संविदा कर्मी धोखाधड़ी में गिरफ्तार
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फोटो
कोविड के दौरान जान गंवाने वाले पेंशनधारक के खाते से उड़ाए थे 8.59 लाख रुपये
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। कोविड की दूसरी लहर के दौरान जान गंवाने वाले पेंशनधारक के खाते से एसबीआई के संविदा कर्मचारी ने आठ लाख 59 हजार रुपये उड़ा दिए। घटना के संबंध में शिकायत मिलने पर साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने जांच के बाद सिगरा थाना क्षेत्र के माधोपुर निवासी सुनील कुमार को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 21500 रुपये, तीन मोबाइल, एक लैपटॉप और एक आधार कार्ड बरामद हुआ है। आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
चंदौली जिले के चौरहट, कटेसर की संध्या सिंह ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की थी। संध्या ने पुलिस को बताया था कि उनके पिता रामेश्वर सिंह यादव की मौत 17 अप्रैल 2021 को हुई थी। उनकी मां सुनीता देवी और पिता का बचत खाता रामनगर स्थित एसबीआई में और संयुक्त बचत खाता पड़ाव स्थित एसबीआई में है। एक जुलाई 2022 को दोनों खातों की पासबुक अपडेट कराने पर पता लगा कि आठ लाख 59 हजार रुपये गलत तरीके से निकाल लिए गए हैं। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी विजय नारायण मिश्र ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर इंस्पेक्टर अनीता सिंह, दरोगा सतीश सिंह और हेड कांस्टेबल श्याम लाल गुप्ता की टीम जांच के लिए गठित की गई। सर्विलांस की मदद से सामने आया कि सुनील कुमार ने दोनों खाते से पैसा निकाला था। उसे पकड़ कर पूछताछ की गई तो प्रकरण की गुत्थी परत दर परत सुलझती चली गई। सुनील ने बताया कि वह रामनगर स्थित एसबीआई में संविदा पर डाटा इंट्री ऑपरेटर का काम करता था। पुराने खाताधारकों की केवाईसी के अधिक से अधिक डाटा उसे फीड करने के लिए कहा गया था। इसके लिए वह पुराने जमा फार्मों व लागिन किए हुए सिस्टम के माध्यम से खाताधारकों के हस्ताक्षर और आधार कार्ड प्राप्त कर बैंक एकाउंट अपडेशन का काम करता था। काफी दिनों से बंद पड़े खातों की जानकारी होने के बाद उसने बैंक कर्मियों के विश्वास का लाभ उठाते हुए लागिन किए हुए सिस्टम से रामेश्वर सिंह के बारे में जानकारी जुटाई। सामने आया कि उनकी मौत हो गई है और उनके खाते से लेनदेन नहीं हो रहा है।
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ऐसे निकाले थे खाते से रुपये
सुनील ने बताया कि खाताधारक रामेश्वर सिंह के खाते का फर्जी फार्म भरकर उनका फर्जी हस्ताक्षर बनाया। इसके बाद उनके पुराने फार्म से आधार कार्ड की फोटोकॉपी लगाकर उसका अपडेशन करवा लिया। इसके बाद उनके खाते की केवाईसी करते हुए अपने दोस्त रोहित कुमार के माध्यम से एक सिम लिया। फिर बैंक में ही काम करने वाले शिव शंकर खरवार का खराब पड़ा मोबाइल बनवाने के नाम पर लेकर उसमें सिम लगा लिया। उसी मोबाइल में योनो ऐप चालू कर एटीएम के माध्यम से पैसा निकालता था। योनो ऐप चालू करने के बाद जानकारी हुई कि रामेश्वर सिंह का एक और खाता पड़ाव स्थित एसबीआई में है लिंक है और उसमें भी पैसे थे। उपरोक्त दोनों खातों से वह धीरे-धीरे पैसा निकालता था। उसमें से लगभग पांच लाख रुपये अपने पिता और परिवार को दिए थे। बाकी पैसे खाने-पीने में खर्च कर दिए। 21500 रुपये ही उसके पास बचे थे।
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कोविड के दौरान जान गंवाने वाले पेंशनधारक के खाते से उड़ाए थे 8.59 लाख रुपये
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। कोविड की दूसरी लहर के दौरान जान गंवाने वाले पेंशनधारक के खाते से एसबीआई के संविदा कर्मचारी ने आठ लाख 59 हजार रुपये उड़ा दिए। घटना के संबंध में शिकायत मिलने पर साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने जांच के बाद सिगरा थाना क्षेत्र के माधोपुर निवासी सुनील कुमार को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 21500 रुपये, तीन मोबाइल, एक लैपटॉप और एक आधार कार्ड बरामद हुआ है। आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
चंदौली जिले के चौरहट, कटेसर की संध्या सिंह ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की थी। संध्या ने पुलिस को बताया था कि उनके पिता रामेश्वर सिंह यादव की मौत 17 अप्रैल 2021 को हुई थी। उनकी मां सुनीता देवी और पिता का बचत खाता रामनगर स्थित एसबीआई में और संयुक्त बचत खाता पड़ाव स्थित एसबीआई में है। एक जुलाई 2022 को दोनों खातों की पासबुक अपडेट कराने पर पता लगा कि आठ लाख 59 हजार रुपये गलत तरीके से निकाल लिए गए हैं। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
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साइबर क्राइम थाना प्रभारी विजय नारायण मिश्र ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर इंस्पेक्टर अनीता सिंह, दरोगा सतीश सिंह और हेड कांस्टेबल श्याम लाल गुप्ता की टीम जांच के लिए गठित की गई। सर्विलांस की मदद से सामने आया कि सुनील कुमार ने दोनों खाते से पैसा निकाला था। उसे पकड़ कर पूछताछ की गई तो प्रकरण की गुत्थी परत दर परत सुलझती चली गई। सुनील ने बताया कि वह रामनगर स्थित एसबीआई में संविदा पर डाटा इंट्री ऑपरेटर का काम करता था। पुराने खाताधारकों की केवाईसी के अधिक से अधिक डाटा उसे फीड करने के लिए कहा गया था। इसके लिए वह पुराने जमा फार्मों व लागिन किए हुए सिस्टम के माध्यम से खाताधारकों के हस्ताक्षर और आधार कार्ड प्राप्त कर बैंक एकाउंट अपडेशन का काम करता था। काफी दिनों से बंद पड़े खातों की जानकारी होने के बाद उसने बैंक कर्मियों के विश्वास का लाभ उठाते हुए लागिन किए हुए सिस्टम से रामेश्वर सिंह के बारे में जानकारी जुटाई। सामने आया कि उनकी मौत हो गई है और उनके खाते से लेनदेन नहीं हो रहा है।
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ऐसे निकाले थे खाते से रुपये
सुनील ने बताया कि खाताधारक रामेश्वर सिंह के खाते का फर्जी फार्म भरकर उनका फर्जी हस्ताक्षर बनाया। इसके बाद उनके पुराने फार्म से आधार कार्ड की फोटोकॉपी लगाकर उसका अपडेशन करवा लिया। इसके बाद उनके खाते की केवाईसी करते हुए अपने दोस्त रोहित कुमार के माध्यम से एक सिम लिया। फिर बैंक में ही काम करने वाले शिव शंकर खरवार का खराब पड़ा मोबाइल बनवाने के नाम पर लेकर उसमें सिम लगा लिया। उसी मोबाइल में योनो ऐप चालू कर एटीएम के माध्यम से पैसा निकालता था। योनो ऐप चालू करने के बाद जानकारी हुई कि रामेश्वर सिंह का एक और खाता पड़ाव स्थित एसबीआई में है लिंक है और उसमें भी पैसे थे। उपरोक्त दोनों खातों से वह धीरे-धीरे पैसा निकालता था। उसमें से लगभग पांच लाख रुपये अपने पिता और परिवार को दिए थे। बाकी पैसे खाने-पीने में खर्च कर दिए। 21500 रुपये ही उसके पास बचे थे।