फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Sawan 2024 Special story of Pita Maheshwar temple in varanasi

काशी का सबसे रहस्यमयी मंदिर: साल में सिर्फ एक दिन ही खुलते हैं मंदिर के कपाट, जानें- क्या है मान्यता और इतिहास

Sat, 17 Aug 2024 08:09 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 17 Aug 2024 08:09 AM IST
सार

काशी का सबसे रहस्यमयी मंदिर पितामहेश्वर का है। जिसके कपाट सावन में भी नहीं खुलते हैं। इस मंदिर में पूरे साल छोटे छिद्र से जलाभिषेक किया जाता है। मंदिर के कपाट केवल महाशिवरात्रि पर दर्शनार्थियों के लिए खोले जाते हैं। 

विज्ञापन
Sawan 2024 Special story of Pita Maheshwar temple in varanasi
पिता महेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संसार की नाभि है मणिकर्णिका तीर्थ और सब तीर्थों की जड़ में आदिदेव महादेव हैं। मंदिरों के शहर में कई रहस्यमयी मंदिर भी हैं जिनकी कहानियां पुराणों से जुड़ी हुई हैं। सिद्धेश्वरी गली में पिता महेश्वर का मंदिर विराजमान है। ये मंदिर खास इसलिए है कि इसके कपाट सावन में भी बंद रहते हैं। साल में सिर्फ एक बार महाशिवरात्रि पर ही ये मंदिर आम दर्शनार्थियों के लिए खुलता है।
विज्ञापन


सिद्धेश्वरी गली में जमीन से 40 फीट नीचे पितामहेश्वर महादेव का शिवलिंग विराजमान हैं। इस मंदिर का रास्ता तीन फीट की गुफानुमा पतली गली से होकर गुजरता है। यह मंदिर साल में बस एक बार शिवरात्रि के दिन आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। अन्य दिनों में जमीन से 40 फीट ऊपर बने एक छिद्र से ही शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। 
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन

शिवरात्रि के दिन एक बार खोला जाता है मंदिर जाने का रास्ता

काशी विश्वनाथ मंदिर से करीब आधा किलोमीटर दूर चौक क्षेत्र के सिद्धेश्वरी गली में ये मंदिर है। मंदिर के पुजारी अंकित मिश्रा ने बताया कि शिवलिंग के ऊपर एक बड़ा सा छेद है उसी से लोग दर्शन करते हैं। इस मंदिर के अंदर जाने वाले रास्ते को साल में बस शिवरात्रि के दिन एक बार खोला जाता है और उस दिन विधिवत रुद्राभिषेक भी किया जाता है। दर्शनार्थियों की सुरक्षा के लिए यह मंदिर बंद रहता है क्योंकि मंदिर परिसर का रास्ता काफी पुराना और जर्जर है।

मनुष्य के 21 कुलों को तार देते हैं पितामहेश्वर

काशी खंड के अनुसार भगवान शिव के काशी आगमन के पश्चात काशी के सिद्धेश्वरी पीठ के निकट पितामहेश्वर नामक लिंग है। पितामहेश्वर साढ़े आठ करोड़ तीर्थों सहित गया तीर्थ से काशी आए हैं। परमपिता ब्रह्मा की तपस्या से भगवान शिव प्रकट हुए थे और उन्होंने पितामहेश्वर के रूप में भक्तों का कल्याण करने का आशीर्वाद दिया था।

काशी में पितामहेश्वर नामक लिंग की सहर्ष पूजा और पिंडदान करने से 21 कुलों के साथ मनुष्य निसंदेह मुक्त हो जाता है। वहीं पर पितामहस्रोती नामक तीर्थ भी है और वहां पर श्राद्ध करने से गया में श्राद्ध का फल मिलता है।

मंदिर को ढूंढते हुए दूर दराज से आते हैं भक्त

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। लोग यह जानने के लिए सबसे अधिक आते हैं कि छोटे से छिद्र से कैसे 40 फीट नीचे बाबा का जलाभिषेक और उनके दर्शन होते हैं। मंदिर के अंदर पिता महेश्वर महादेव और उनके ऊपर स्वर्ण सर्प विराजमान हैं। पुजारी परिवार के सदस्य तीन पहर इस मंदिर में पूजा पाठ भोग लगाते हैं। इसके अलावा किसी को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता है। मंदिर के नीचे जाने के लिए एक पतली सी सीढ़ी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed