तैयारी: पेरिस के बिएनाले की तर्ज पर सजेगी काशी, शीर्ष 100 उद्यमियों को जोड़ेंगे; पीएम-सीएम, राज्यपाल को न्योता
काशी अब ग्लोबल कल्चरल हब बनेगा। 27 नवंबर से 31 दिसंबर तक प्रस्तावित काशी बिएनाले में पीएम मोदी, सीएम योगी और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को निमंत्रण भेजा गया है।
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काशी अब अपनी कला, संस्कृति और जीवंत विरासत के जरिये वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान बनाने की तैयारी में है। 27 नवंबर से 31 दिसंबर तक प्रस्तावित काशी बिएनाले में देश-विदेश की कला-संस्कृति और उद्योग जगत की हस्तियां एक मंच पर जुटेंगी।
आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को निमंत्रण भेजा गया है। इटली, स्पेन, अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों से कला, संस्कृति और उद्यमिता से जुड़े प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। देश के शीर्ष 100 उद्यमियों समेत करीब एक हजार उद्यमियों को आयोजन से जोड़ने की तैयारी है।
पेरिस में आयोजित बिएनाले की तर्ज पर काशी को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच के रूप में स्थापित करने की योजना है। आयोजन किसी एक प्रदर्शनी या स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा बनारस इसका हिस्सा होगा। ‘काशी लाइट- सिटी एज सेंसरियम’ थीम पर प्रस्तावित बिएनाले में काशी को केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि कला, संगीत, शिल्प, परंपरा, स्वाद, ध्वनि और स्मृतियों के जरिये महसूस किए जाने वाले शहर के रूप में दुनिया के सामने पेश किया जाएगा।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के मुताबिक इटली, स्पेन, अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों से कला, संस्कृति और उद्यमिता से जुड़े प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जा रहा है। इससे काशी में संस्कृति और उद्योग के बीच नए संवाद और सहयोग की संभावनाएं बनेंगी।
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बिएनाले की सबसे खास बात यह होगी कि आयोजन किसी बंद परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। बीएचयू, भारत कला भवन, ज्ञान प्रवाह, नमो घाट और तुलसी घाट समेत कई स्थान इसके प्रमुख केंद्र होंगे। भारत कला भवन में चित्रकला, मूर्तिकला, छायाचित्र, वीडियो, पांडुलिपियों और बनारसी वस्त्रों से जुड़ी प्रदर्शनियां प्रस्तावित हैं।
विदेशी कला जगत और भारतीय उद्योग का संगम
बिएनाले में कला और उद्योग के बीच संवाद को विशेष महत्व दिया जा रहा है। विदेशों से आने वाले प्रतिनिधियों के साथ भारतीय उद्योग जगत के बड़े नामों को जोड़कर संस्कृति, पर्यटन, शिल्प, डिजाइन, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर तलाशे जाएंगे। सीआईआई के हर्षित पांडेय ने बताया कि बिएनाले को एक बार का आयोजन बनाने के बजाय दीर्घकालिक राष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्था के रूप में विकसित करने की योजना है।
बुनकरों और युवाओं को भी मिलेगा सीधा लाभ
रामनगर, लोहता और बड़ी बाजार के बुनकर समूहों के लिए स्वस्थ बुनकर पहल शुरू की जाएगी। करीब चार से पांच हजार बुनकरों और उनके परिवारों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके साथ काशी में शिल्प प्रशिक्षण संस्थान, रोजगार केंद्र और बीएचयू में उद्योग आधारित रोजगार एवं कौशल केंद्र जैसी दीर्घकालिक पहल भी प्रस्तावित हैं। पूर्वांचल के भदोही, मिर्जापुर, चंदौली और आजमगढ़ में भी कौशल प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने की योजना है।
बिएनाले में दृश्य कला और छायाचित्र, शिल्प, डिजाइन और वस्त्र, संगीत व प्रदर्शन कलाओं के साथ विचार-विमर्श और विशेषज्ञ संवाद होंगे। काशी की संगीत परंपरा को भी विशेष स्थान मिलेगा। तबला, शहनाई, खयाल, ध्रुपद के साथ कजरी, चैती और ठुमरी जैसी विधाओं को कार्यक्रमों में शामिल करने की योजना है। बिएनाले हर दो साल पर एक बार आयोजित किया जाता है। इस साल से इसकी शुरुआत काशी में हो रही है। -सत्येंद्र कुमार, डीएम