सर्व सेवा संघ का मामला: आंखों में आंसू लिए समेटा सामान, कोई दरवाजा पकड़कर रोया तो किसी ने सुनाई व्यथा
सर्व सेवा संघ का भवन व परिसर शनिवार को खाली करा लिया गया। बुलडोजर व भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे प्रशासनिक व रेलवे के अधिकारियों ने सामान बाहर निकलवाना शुरू किया तो पदाधिकारी व लोगों ने विरोध किया। घर-गृहस्थी का सामान समेटते हुए अपनी व्यथा बताते गीता देवी फफक कर रोने लगीं। आंखों में आंसू भरे गीता सवाल करती हैं कि हमारा क्या दोष है?
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गांधी-जेपी की विरासत के नाम से मशहूर राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ का भवन व परिसर शनिवार को खाली करा लिया गया। बुलडोजर व भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे प्रशासनिक व रेलवे के अधिकारियों ने सामान बाहर निकलवाना शुरू किया तो पदाधिकारी व लोगों ने विरोध किया। इसके बाद पुलिस ने सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल और संयोजक रामधीरज सहित आठ लोगों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। देर शाम मेडिकल कराने के बाद सभी आरोपियों को पुलिस आयुक्त की कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। सामान हटाने के दाैरान पुलिस व संघ पदाधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। पदाधिकारियों ने दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए। जैसे ही सारा सामान बाहर आ जाएगा, वैसे ही बुलडोजर चल सकता है।
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जहां बच्चे पले-बढ़े, उस आवास व जगह को छोड़कर जाने की पीड़ा शासन-प्रशासन नहीं समझ सकता है। घर-गृहस्थी के सामान समेटते हुए अपनी व्यथा बताते गीता देवी फफक कर रोने लगीं। आंखों में आंसू भरे गीता सवाल करती हैं कि हमारा क्या दोष है?
अब सामान लेकर कहां जाएंगे। गीता जैसे ही कई परिवार मिले, जो एक झटके में परिसर से बाहर किए जाने से मर्माहत थे। कितने ऐसे भी परिवार थे, जिनके सदस्य दरवाजे से लिपट कर रोने लगे। कलेजे पर पत्थर रखकर आवास छोड़कर मालवाहक वाहन से निकल गए।
बचपन से रह रहे थे। पुलिस फोर्स ने सुबह ही दरवाजा खटखटाया और फरमान सुना दिया कि आवास दो घंटे में खाली करिए। अन्यथा सामान जब्त कर लिया जाएगा। जबरन सामान निकलवाया गया। यह ज्यादती है। -उज्जवल पांडेय
इस बारिश में लोग कहां जाएंगे। सुबह छह बजे ही परिसर में पुलिस का जमावड़ा लग गया। भवन व परिसर को खाली कराना शुरू कर दिया। किताबें हटाई गईं। सर्व सेवा प्रकाशन की पांच लाख से अधिक पुस्तकें हैं। सब कुछ हटाने को कहा गया। कोई राहत नहीं दी गई। 28 जुलाई काे जिला कोर्ट में सुनवाई होनी है, इसे नजरअंदाज कर दिया गया। यह विचारों पर हमला है। - मोहम्मद आरिफ, लोकसेवक
परिसर में पैदल चलना सीखा है। 1960 से 1980 तक तक यहां रहा। बहुत सी यादें जुड़ी हैं। शासन, प्रशासन का यह फैसला बिल्कुल गलत है। यह विनोबा भावे, जेपी-गांधी की विरासत पर हमला है। बुलडोजर चलाने की तैयारी है।- अफलातून देसाई, गांधीवादी