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चंद्र किरणों के साथ बरसा अमृत, पायस में संजोया
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शरद पूर्णिमा का चांद
आश्विन मास की पूर्णिमा पर 16 कलाओं से युक्त चंद्रमा ने अमृत का रस बरसाया। शरद पूर्णिमा की रात रविवार को श्री-समृद्धि की कामना से श्रद्धालुओं ने महालक्ष्मी की आराधना की। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा के लिए भक्तों ने विविध अनुष्ठान किए। मठ-मंदिरों में देव विग्रहों की खुले आसमान के नीचे श्वेत वस्त्र व फूलाें से झांकी सजाकर पूजन हुआ।
खीर-मिष्ठान और पकवानों का भोग लगाया गया। घरों में रात्रि जागरण कर महालक्ष्मी व भगवान श्री हरि का सुमिरण किया गया। चंद्र से बरसने वाले अमृत को सहेजने की आस से घरों की छतों पर पायस भी रखी गई। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की बरसात होती है। इस शास्त्रीय आधार पर लोगों ने घरों में गाय के दूध की खीर बनाई और उसे छत पर रखा।
इस विश्वास के साथ कि चंद्रमा की किरणों से निकला अमृत उसमें भी मिल जाए ताकि इसे खाकर आरोग्य की प्राप्ति की जा सके। कुछ श्रद्धालुओं ने व्रत रखे और गंगा स्नान भी किया। वहीं दूसरी तरफ बंगाली समुदाय में शरद पूर्णिमा पर कोजागरी पूर्णिमा मनाई गई। देवनाथपुरा, बंगालीटोला, जंगमबाड़ी, दशाश्वमेध, खालिसपुरा, गणेश महाल, सोनारपुरा, रामापुरा और लक्सा आदि मोहल्लों में सुबह से ही कोजागरी की तैयारियां होती रहीं।
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वेद पारायण केंद्र में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के आचार्यत्व में श्रीयंत्र का पूजन व अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्वानों को सम्मानित भी किया गया।
शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात ही गोपियों संग महारास रचाया था। उस खास मौके को यादकर वैष्णवजनों ने रासोत्सव मनाया। राधा-कृष्ण का श्वेत-धवल वस्त्र व फू लों से झांकी सजाई। मक्खन-मिश्री समेत श्वेत मिष्ठान अर्पित कर पूजन अर्चन किया।
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खीर-मिष्ठान और पकवानों का भोग लगाया गया। घरों में रात्रि जागरण कर महालक्ष्मी व भगवान श्री हरि का सुमिरण किया गया। चंद्र से बरसने वाले अमृत को सहेजने की आस से घरों की छतों पर पायस भी रखी गई। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की बरसात होती है। इस शास्त्रीय आधार पर लोगों ने घरों में गाय के दूध की खीर बनाई और उसे छत पर रखा।
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इस विश्वास के साथ कि चंद्रमा की किरणों से निकला अमृत उसमें भी मिल जाए ताकि इसे खाकर आरोग्य की प्राप्ति की जा सके। कुछ श्रद्धालुओं ने व्रत रखे और गंगा स्नान भी किया। वहीं दूसरी तरफ बंगाली समुदाय में शरद पूर्णिमा पर कोजागरी पूर्णिमा मनाई गई। देवनाथपुरा, बंगालीटोला, जंगमबाड़ी, दशाश्वमेध, खालिसपुरा, गणेश महाल, सोनारपुरा, रामापुरा और लक्सा आदि मोहल्लों में सुबह से ही कोजागरी की तैयारियां होती रहीं।
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वेद पारायण केंद्र में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के आचार्यत्व में श्रीयंत्र का पूजन व अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्वानों को सम्मानित भी किया गया।
शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात ही गोपियों संग महारास रचाया था। उस खास मौके को यादकर वैष्णवजनों ने रासोत्सव मनाया। राधा-कृष्ण का श्वेत-धवल वस्त्र व फू लों से झांकी सजाई। मक्खन-मिश्री समेत श्वेत मिष्ठान अर्पित कर पूजन अर्चन किया।