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गुरु चरणों की रज लेकर संत निरंजन दास संगत के साथ रवाना

Fri, 18 Feb 2022 12:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 18 Feb 2022 12:14 AM IST
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Sant Niranjan Das left with the sangat with the blessings of Guru's feet
वाराणसी। संत रविदास की जन्मस्थली पर अपने गुरु का जन्मोत्सव मनाने के बाद संत निरंजन दास के साथ बृहस्पतिवार की दोपहर एक बजे श्रद्धालुओं की पहली स्पेशल ट्रेन रवाना हुई।
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मंदिर के प्रमुख संत गद्दीनशीन 108 संत निरंजन दास ने सरकार और स्थानीय प्रशासन का आभार जताते हुए देश की जनता को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ ही एकता के साथ मिलजुल कर रहने का संदेश देते हुए कहा सत संगत मिल रहिए माधव जैसे मधुप मखीरा मधुमक्खी जैसे एक छत्ते में मिलकर रहती है उसी प्रकार एकसाथ रहना चाहिए।
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संत निरजंन दास ने मंदिर में संत रविदास की प्रतिमा को नमन करने के बाद संत मनदीप दास और संतों के साथ ही ट्रस्ट के एल सरोआ, निरंजन चीमा, मैनेजर रनवीर सिंह और श्रद्धालुओं के साथ कैंट स्टेशन के लिए निकले। जयंती के समापन पर श्रद्धालुओं और संगत के घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया। वापस लौटने से पहले श्रद्धालु संत की जन्मस्थली को नमन करते फिर अगली जयंती में आने का संदेश लेकर भावुक होकर निकलते रहे।
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रविदासियाधर्म के प्रचार-प्रसार पर चर्चा
संत रविदास जयंती के सकुशल संपन्न होने के बाद रविदासिया धर्म संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव वाघमारे और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा मंदिर के संत मनदीप दास ने संगठन के पदाधिकारियों के साथ मंदिर में एक बैठक की। जिसमें संत की जन्मस्थली के विकास और रविदासिया धर्म के प्रचार प्रसार और संगठन को मजबूत बनाने की चर्चा की गई।

आज पंजाब जाएगी दूसरी ट्रेन
दूसरी स्पेशल ट्रेन शुक्रवार को रैदासी भक्तों को लेकर वापस पंजाब जाएगी। ज्यादातर भक्त और सेवादार अन्य ट्रेनों और बस तथा निजी वाहनों से काशी से वापस जा रहे हैं। जयंती में आने वाले देश विदेश के श्रद्धालु घर वापसी के पहले दुकानों से कुछ न कुछ खरीदारी करते दिखे। इनका मानना है कि ये संत रविदास की जन्मस्थली का प्रसाद है। यहां न आने वालों को प्रसाद के रूप में देते हैं। श्रद्धालु यहां से खरीदी कोई एक वस्तु को अपने पूजा घरों में रखते हैं।
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