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मंदिर नहीं गरीबों की झोपड़ियां बनाएं धनपति
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2015 02:08 AM IST
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वाराणसी। संत मोरारी बापू ने गुरुवार को जिंदगी की हर बाजी जीतने के लिए ईश्वर की शरण में जाने का संदेश दिया। साथ ही, अमीरी-गरीबी के फर्क पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि गरीबी से बड़ी कोई समस्या नहीं है। ऐसे में व्यवसाय से अर्जित धन का सदुपयोग गरीबों की मदद में करना चाहिए।
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मंदिर न बनाएं लेकिन जिनके पास सिर छिपाने के लिए झोपड़ियां नहीं हैं, उनके लिए अगर छोटे-छोटे मकान बनवा दिए तो काशी में कबीर, रैदास की आत्मा को शांति मिलेगी।
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अस्सी घाट से लगे गंगा तट पर भव्य पंडाल में संत मोरारी बापू ने कहा कि गरीब चोरी नहीं कर सकता। अगर करेगा भी तो अपनी जरूरत के हिसाब से महज कुछ कपड़े और अन्न। बड़ी चोरियां सिर्फ बड़े लोग ही करते हैं। बापू ने कहा कि स्वर्ग पुण्य के बिना नहीं मिल सकता।
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पुण्य धन के बिना नहीं मिलता और धन कभी शोषण के बिना नहीं अर्जित होता। ऐसे में धनपतियों को चाहिए कि वे साधु-संतों को थोड़ा कम दें लेकिन गरीबों का गला कतई न घोंटें। उन्होंने रामकथा में महाभारत के प्रसंगों को भी उठाया। कहा कि दुर्योधन बहरा था। वह विदुर की तो कतई नहीं सुनता था।
महाभारत के युद्ध से पहले अर्जुन और दुर्योधन जब दोनों कृष्ण से मदद लेने पहुंचे थे, तब कृष्ण ने साफ कहा था कि मैं तो जिस ओर भी रहूंगा, लड़ूंगा नहीं। लड़ेगी मेरी नारायणी सेना। दुर्योधन को कृष्ण की भी बात सुनाई नहीं पड़ी। उसने नारायणी सेना पहले ही मांग ली। कृष्ण जब अर्जुन के रथ पर सारथी के रूप में सवार हुए तभी पांडवों की जीत पक्की हो गई थी। ओशो ने भी महाभारत के इस प्रसंग की यही व्याख्या की है।
युद्ध जीतने के बाद कृष्ण ने जब अर्जुन को रथ से उतारा और खुद उतर गए तब उसी रथ की ध्वजा से हनुमान जी भी निकले थे। यानी गुरु-गोविंद दोनों अर्जुन के रथ पर थे। रथ से उनके उतरते ही उसमें आग लग गई थी। जीवन रूपी रथ से भी प्राणेश्वर कृष्ण के उतरने के बाद इस शरीर को जलाने के अलावा कुछ नहीं बचता। संत ने कहा कि न दिखने वाली रहमतों से ही संसार चल रहा है
। इसलिए चौबीस घंटे में एक बार किसी बुद्ध महापुरुष की रहमतों को जरूर याद करना चाहिए। कथा के बाद कुंवर अनंत नारायण सिंह, रामकथा प्रेमयज्ञ समिति के अध्यक्ष केशव जालान, कृष्ण कुमार जालान, अशोक अग्रवाल, अखिलेश खेमका ने व्यास पीठ की आरती उतारी।