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संकट मोचनः शिव के गरलपान से हुआ संगीत के महाकुंभ का शुभारंभ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 05 Apr 2018 02:20 PM IST
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संकट मोचन संगीत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
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संकट मोचन मंदिर में संगीत के महाकुंभ का श्रीगणेश बुधवार की शाम को हो गया। ओडिसी नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने जहां भगवान शिव और उनके रुद्र स्वरूप की आराधना से संगीत संध्या आरंभ की वहीं भजन सम्राट अनूप जलोटा ने भी भजनांजलि से श्रोताओं को भक्ति के रस में सराबोर कर दिया।
सोनल मान सिंह की संस्था कामाख्या पीठ के कलाकारों ने शिवपुराण की कथा प्रसंग समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव के गरलपान प्रकरण से नृत्य आरंभ किया।
समुद्र मंथन के दौरान निकलने वाले हलाहल का पान कर नीलकंठ बनने तक की यात्रा का ओडिसी नृत्य के माध्यम से मंचन देखकर सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। अगली प्रस्तुति में कलाकारों ने कालिया मर्दन के माध्यम से नदी प्रदूषण के दर्द को भी श्रोतादर्शकों को अहसास कराया।
भगवान कृष्ण द्वारा कालिया नाग के मर्दन को दर्शका दम साधे हुए देखते रहे। इस प्रस्तुति के दौरान एक तरफ जहां ओडिसी नृत्य की पारंपरिक स्वरूप को सोनल मानसिंह के शिष्यों ने यथावत रखा वहीं दूसरी तरफ इस प्रस्तुति को आकर्षक और प्रभावी बनाने के लिए कई नवीन विधाओं का समावेश भी दिखाई पड़ा।
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सोनल मान सिंह की संस्था कामाख्या पीठ के कलाकारों ने शिवपुराण की कथा प्रसंग समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव के गरलपान प्रकरण से नृत्य आरंभ किया।
समुद्र मंथन के दौरान निकलने वाले हलाहल का पान कर नीलकंठ बनने तक की यात्रा का ओडिसी नृत्य के माध्यम से मंचन देखकर सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। अगली प्रस्तुति में कलाकारों ने कालिया मर्दन के माध्यम से नदी प्रदूषण के दर्द को भी श्रोतादर्शकों को अहसास कराया।
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भगवान कृष्ण द्वारा कालिया नाग के मर्दन को दर्शका दम साधे हुए देखते रहे। इस प्रस्तुति के दौरान एक तरफ जहां ओडिसी नृत्य की पारंपरिक स्वरूप को सोनल मानसिंह के शिष्यों ने यथावत रखा वहीं दूसरी तरफ इस प्रस्तुति को आकर्षक और प्रभावी बनाने के लिए कई नवीन विधाओं का समावेश भी दिखाई पड़ा।
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दर्शकों हुए मंत्रमुग्ध
प्रस्तुति देते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद सोनल मानसिंह मंचासीन हुई और उन्होंने ओडिसी की विविधतापूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को एक बार पुनरू आनंदित किया। उन्होंने संकट मोचन नाम तिहारोण्ण्ण्पर भाव नृत्य कर संकटमोचन हनुमान जी को अपनी भावांजलि पेश की।
उनके साथ नंदिनी, राजू, स्वराणली कुंडू, अर्जुन देव मलिक ने बेहतर नृत्य की भाव भंगिमाओं का मंचन किया। दूसरे कलाकार ने कथक में ध्रुपद अंग में शिव स्तुति की। इसके बाद ताल चौताल में जयपुर घराने की नृत्य की बारीकियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने पखावज अंग की परनों को बखूबी प्रदर्शित किया। भजन.परम कृपा स्वरूप . में भगवान राम द्वारा भक्तों पर की गई कृपा का प्रदर्शन किया। समापन उन्होंने द्रुत तीन ताल में प्रस्तुति से किया।
तीसरे कलाकार के रूप में गणेश मिश्र ने ठुमरी . राजा जी हमरो घूंघट पट खोलो... सुनाकर भाव विभोर कर दिया। समापन उन्होंने दादरा डगर बिच कैसे चलूं मग रोके कन्हैया.... सुनाकर समां बांध दी।
उनके साथ नंदिनी, राजू, स्वराणली कुंडू, अर्जुन देव मलिक ने बेहतर नृत्य की भाव भंगिमाओं का मंचन किया। दूसरे कलाकार ने कथक में ध्रुपद अंग में शिव स्तुति की। इसके बाद ताल चौताल में जयपुर घराने की नृत्य की बारीकियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने पखावज अंग की परनों को बखूबी प्रदर्शित किया। भजन.परम कृपा स्वरूप . में भगवान राम द्वारा भक्तों पर की गई कृपा का प्रदर्शन किया। समापन उन्होंने द्रुत तीन ताल में प्रस्तुति से किया।
तीसरे कलाकार के रूप में गणेश मिश्र ने ठुमरी . राजा जी हमरो घूंघट पट खोलो... सुनाकर भाव विभोर कर दिया। समापन उन्होंने दादरा डगर बिच कैसे चलूं मग रोके कन्हैया.... सुनाकर समां बांध दी।