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संकटमोचन संगीत समारोह : सितार, गायन और वादन से कलाकारों ने लगाई हाजिरी

Mon, 03 May 2021 12:06 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 03 May 2021 12:06 AM IST
सार

दूसरी निशा की शुरुआत स्व. पं. जसराज के वीडियो से हुई
श्रोताओं ने किया पं. जसराज और हनुमत दरबार को नमन

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Sankatmochan Music Festival: Artists present with sitar, singing and playing
संकट मोचन संगीत समारोह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में संकटमोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा दर्शकों के लिए यादगार बन गई। संगीत मार्तंड पं. जसराज के पिछले साल के कार्यक्रम से शुभारंभ ने दर्शकोंं को भी भावविभोर कर दिया। आभासी दुनिया के मंच पर दर्शकों ने हनुमत लला के साथ ही पं. जसराज को भी नमन किया।

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रविवार को संगीत समारोह की अगली कड़ी में युवा कलाकार अंकुर मिश्र ने सितार वादन की प्रस्तुति दी। उन्होंने राग रागेश्री में रुपक एवं तीनताल में आलाप, जोड़ एवं झाला के जरिए हनुमत दरबार में हाजिरी लगाई। तत्पश्चात राग पीलू में धुन बजाकर समापन किया। तबले पर अभिषेक मिश्र ने संगत की। इसके बाद कथक नृत्यांगना वसुंधरा शर्मा ने शिव स्तुति से शुभारंभ किया। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। बनारस घराने के विख्यात गायक पं. देवाशीष डे ने स्वरांजलि अर्पित की। इसके पूर्व शनिवार को पहली निशा की तीसरी प्रस्तुति अतुल शंकर के बांसुरी वादन की रही।

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सुधीर गौतम ने बंशी वादन और तबले पर सहयोग पं. ललित कुमार का रहा। अतुल शंकर ने श्रीराम चंद्र कृपालु भजमन की सुमधुर प्रस्तुति दी। इसके बाद अगली प्रस्तुति बनारस घराने के प्रसिद्ध क लाकार गणेश प्रसाद मिश्र की रही। उन्होंने राग रागेश्वरी में पहली रचना कान्हा बांसुरी वाला, दूसरी रचना तीन ताल में प्रभु गुन गाओ रे तू मन..., के बाद बनारसी चैती चैत मासे सैयां नहीं अइले हो रामा जिया घबराए की प्रस्तुति दी।

इसी क्रम में ठुमरी ना मानूंगी ना मानूंगी उनके मनाए बिना... पेश किया। इसके बाद पं. राजन मिश्र को समर्पित धन्य भाग सेवा का अवसर पाया... सुनाकर श्रद्धासुमन अर्पित किया। तबला वादन के माध्यम से सिद्धांत मिश्र ने सहयोग प्रदान किया। अंतिम प्रस्तुति पं. सुखदेव प्रसाद मिश्र के वायलिन वादन की रही। उन्होंने वायलिन वादन के माध्यम से प्रभु चरणों में शीश नवाया। उन्होंने राग मालकौंस में आलाप जोड़ एवं झाला की पारंपरिक प्रस्तुति दी। तबले पर पं. किशोर कुमार मिश्र ने संगत की। तकनीकी विशेषज्ञ अंकित श्रीवास्तव, अनुराग और हर्षित श्याम जायसवाल ने तकनीकी रूप से सहयोग किया। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।

Sankatmochan Music Festival: Artists present with sitar, singing and playing
प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, महंत, संकटमोचन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

पं. जसराज हर साल अर्पित करते थे स्वरांजलि
संगीत मार्तंड पद्मविभूषण स्व. पं. जसराज जी उन कलाकारों में से थे जो हर वर्ष भगवान को अपनी स्वरांजलि अर्पित करते थे। पिछले वर्ष उन्होंने दो बार हनुमान जन्मोत्सव और संगीत समारोह के दिन अपनी आस्था अमेरिका केन्यू जर्सी से भगवान के चरणों में अर्पित की थी। जब वह इस वर्ष नहीं हैं तो श्रोताओं के कहने पर उनका यादगार अंतिम वीडियो चलाया गया। - प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, महंत, संकटमोचन मंदिर

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