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Sankat Mochan Sangeet Samarooh:चार साल में 12 लाख से 31 लाख हुए संकट मोचन संगीत समारोह के मुरीद
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101वें संकट मोचन संगीत समारोह का आगाज 27 अप्रैल यानी शनिवार से हो रहा है। साल दर साल इस समारोह के मुरीद बढ़ते ही जा रहे हैं। यही वजह है कि सौ साल पूरे कर चुका ये समारोह उस साल भी कायम रहा जब पूरी दुनिया में सभी आयोजनों पर लगाम लग गया था। साल 2020 में कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में ये समारोह ऑनलाइन हुआ और उसके बाद ये सिलसिला आज भी जारी है। इस कार्यक्रम की सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग की जाती है और इन चार वर्षों में इसके मुरीद तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गए।
कोविड कॉल में परंपरा ना टूटे, इसलिए 2020 में संगीत समारोह का 97वां संस्करण डिजिटल कराया गया। देश-विदेश के नामचीन कलाकार और दर्शक इससे वर्चुअली जुड़े और इस परंपरा को प्रवाहमान बनाए रखा। पहले साल ऑनलाइन हुए इस समारोह में पंडित जसराज ने अमेरिका के न्यू जर्सी शहर से ऑनलाइन प्रस्तुति दी। पंडित जसराज 1974 से लगातार हनुमान जी के दरबार में हाजिरी लगाते रहे हैं। पहले साल यानी 2020 में इस समारोह से 12 लाख लोग जुड़े। लॉकडाउन की वजह से 2021 में भी ये समारोह ऑनलाइन कराया गया। उस साल 18 लाख लोग इस समारोह के ऑनलाइन साक्षी बने। इसके बाद 2022 में एक बार फिर से जब ये समारोह हनुमत दरबार में शुरू हुआ तो लोगों को अनुरोध में इसका डिजिटल संस्करण जारी रहा। 2022 में 26 लाख लोगों ने इस समारोह को ऑनलाइन देखा। वहीं, 2023 में इससे 31 लाख दर्शक जुड़े। इस तरह इन चार सालों में देश-विदेश के 87 लाख संगीत रसिक इस समारोह से आनंदित हुए।
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि कोरोना काल के बाद संगीत समारोह मंदिर में शुरू हुआ। मगर ऑनलाइन सुविधा बंद नहीं की गई। इसे और बढ़ाया गया। अब तो ऑफलाइन से ज्यादा ऑनलाइन दर्शक इस समारोह से जुड़ते हैं।
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न कार्ड न न्योता फिर भी पहुंचते हैं हजारों
संकटमोचन संगीत समारोह वैश्विक हो चुका है। हनुमत दरबार में हाजिरी लगाने वालों और समारोह का चाहने वाले ऑनलाइन प्रसारण करवाने का अनुरोध भी करते हैं। इस समारोह से लाखों लोग जुड़ते हैं। इसकी खासियत ये भी है कि इस समारोह के लिए न कोई कार्ड छपता है और न किसी को न्योता भेजा जाता है। फिर भी हजारों श्रोता यहां पहुंचते हैं। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि इसके कोई अध्यक्ष और अतिथि भी नहीं होते हैं। आम व खास का भी बंधन नहीं होता है। हनुमत प्रभु ही इसके सबकुछ होते हैं।
हनुमत दरबार में शीर्ष कलाकार लगाते हैं हाजिरी
संकटमोचन संगीत समारोह में देश के शीर्ष कलाकार भी हाजिरी लगा चुके हैं। पं. रविशंकर मिश्र, गोदई महाराज, पं. जयराज, पं. किशन महाराज, शिवकुमार शर्मा, अमजद अली खां, गुुलाम अली सहित हजारों कलाकारों ने हाजिरी लगाई है। इस संगीत समारोह में हाजिरी लगाने के लिए हर कलाकार आतुर रहते हैं।
पं. अमरनाथ ने रखी थी नींव
संकट मोचन मंदिर के महंत पं. अमरनाथ मिश्र ने संकट मोचन संगीत समारोह की नींव 1923 में रखी थी। तब स्थानीय कलाकार ही भाग लेते थे। प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि धीरे-धीरे इसकी ख्याति बढ़ने लगी। इसके बाद देश-विदेश के कलाकारों के अलावा दर्शक भी जुड़ने लगे। अब यह संगीत का लोकपर्व बन गया है।
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कोविड कॉल में परंपरा ना टूटे, इसलिए 2020 में संगीत समारोह का 97वां संस्करण डिजिटल कराया गया। देश-विदेश के नामचीन कलाकार और दर्शक इससे वर्चुअली जुड़े और इस परंपरा को प्रवाहमान बनाए रखा। पहले साल ऑनलाइन हुए इस समारोह में पंडित जसराज ने अमेरिका के न्यू जर्सी शहर से ऑनलाइन प्रस्तुति दी। पंडित जसराज 1974 से लगातार हनुमान जी के दरबार में हाजिरी लगाते रहे हैं। पहले साल यानी 2020 में इस समारोह से 12 लाख लोग जुड़े। लॉकडाउन की वजह से 2021 में भी ये समारोह ऑनलाइन कराया गया। उस साल 18 लाख लोग इस समारोह के ऑनलाइन साक्षी बने। इसके बाद 2022 में एक बार फिर से जब ये समारोह हनुमत दरबार में शुरू हुआ तो लोगों को अनुरोध में इसका डिजिटल संस्करण जारी रहा। 2022 में 26 लाख लोगों ने इस समारोह को ऑनलाइन देखा। वहीं, 2023 में इससे 31 लाख दर्शक जुड़े। इस तरह इन चार सालों में देश-विदेश के 87 लाख संगीत रसिक इस समारोह से आनंदित हुए।
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संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि कोरोना काल के बाद संगीत समारोह मंदिर में शुरू हुआ। मगर ऑनलाइन सुविधा बंद नहीं की गई। इसे और बढ़ाया गया। अब तो ऑफलाइन से ज्यादा ऑनलाइन दर्शक इस समारोह से जुड़ते हैं।
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न कार्ड न न्योता फिर भी पहुंचते हैं हजारों
संकटमोचन संगीत समारोह वैश्विक हो चुका है। हनुमत दरबार में हाजिरी लगाने वालों और समारोह का चाहने वाले ऑनलाइन प्रसारण करवाने का अनुरोध भी करते हैं। इस समारोह से लाखों लोग जुड़ते हैं। इसकी खासियत ये भी है कि इस समारोह के लिए न कोई कार्ड छपता है और न किसी को न्योता भेजा जाता है। फिर भी हजारों श्रोता यहां पहुंचते हैं। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि इसके कोई अध्यक्ष और अतिथि भी नहीं होते हैं। आम व खास का भी बंधन नहीं होता है। हनुमत प्रभु ही इसके सबकुछ होते हैं।
हनुमत दरबार में शीर्ष कलाकार लगाते हैं हाजिरी
संकटमोचन संगीत समारोह में देश के शीर्ष कलाकार भी हाजिरी लगा चुके हैं। पं. रविशंकर मिश्र, गोदई महाराज, पं. जयराज, पं. किशन महाराज, शिवकुमार शर्मा, अमजद अली खां, गुुलाम अली सहित हजारों कलाकारों ने हाजिरी लगाई है। इस संगीत समारोह में हाजिरी लगाने के लिए हर कलाकार आतुर रहते हैं।
पं. अमरनाथ ने रखी थी नींव
संकट मोचन मंदिर के महंत पं. अमरनाथ मिश्र ने संकट मोचन संगीत समारोह की नींव 1923 में रखी थी। तब स्थानीय कलाकार ही भाग लेते थे। प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि धीरे-धीरे इसकी ख्याति बढ़ने लगी। इसके बाद देश-विदेश के कलाकारों के अलावा दर्शक भी जुड़ने लगे। अब यह संगीत का लोकपर्व बन गया है।