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संकट मोचन संगीत समारोह: 35 साल बाद गूंजा विभास राग, कश्मीरी पंडित परिवार के कलाकार ने संतूर पर दी प्रस्तुति

Sun, 20 Apr 2025 09:56 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sun, 20 Apr 2025 09:56 AM IST
सार

Sankat Mochan Music Festival: संकट मोचन मंदिर में 35 साल बाद विभास राग गूंजा। संगीत समारोह में कश्मीरी पंडित परिवार के कलाकार ने संतूर पर प्रस्तुति दी। 

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Sankat Mochan Music Festival Kashmiri Pandit family artist performed on Santoor in varanasi
संकट मोचन संगीत समारोह में प्रस्तुति देते पं. अभय रुस्तम सोपोरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब 35 वर्ष बाद श्रोताओं को संकट मोचन मंदिर में राग विभास सुनने को मिला। छठीं प्रस्तुति लेकर मंच पर आए पं. अभय रुस्तम सोपोरी ने संतूर पर राग विभास की धुन हनुमान जी को समर्पित की। मंच पर कहा कि शायद 30-35 साल से यहां कभी विभास राग नहीं बजा। अब नहीं बजा तो आज ही सही। राग विभास भोर में गाई जाती है। आलाप जोड़ के साथ गंभीर स्वर, गतकारी में लयकारियां और पिता पंडित भजन सोपोरी की तरह सोपोरी बाज शैली कर रंग प्रस्तुत किया। विख्यात तबला वादक पं. संजू सहाय और एक विदेशी संगीत प्रेमी ने बेहतरीन जुगलबंदी की।

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तीसरी निशा की तीसरी प्रस्तुति खत्म होते ही श्रोता राजेश कुमार ने माहनवीणा वादक पं. विश्व मोहन भट्ट को उनकी रिप्लिका भेंट की। पत्थर की बनी मूर्ति बेबीलोनिया की किसी प्राचीन प्रतिमा की तरह से लग रही थी। इसे पाकर विश्व मोहन भट्ट ने मूर्ति बनाने वाले को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।

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रघुकुल में प्रगटे रघुबीर पर झूमे भक्त

पांचवीं प्रस्तुति में चेन्नई की दीपिका वरदराजन ने अपने सुरीले कंठ से रघुकुल में प्रगटे रघुबीर और हनुमान लला तुम प्यारे लला और राम-राम जय राजा राम गाकर हनुमान जी की आराधना की। राग बागेश्री में तीन बंदिशें एक ताल, तीन ताल और द्रुत एक ताल में गाकर श्रोताओं को अपना मुरीद बना दिया। उद्धव ने तबले पर और मोहित साहनी ने संवादिनी पर संगत की।

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राग भटियार में ख्याल गायकी

गया के राजेंद्र सेजवार ने राग नटभैरव में ख्याल और ठुमरी गायन से श्रोताओं को भोर का एहसास कराया। पं. कुबेरनाथ मिश्र ने तबले पर, संवादिनी पर पं. धर्मनाथ मिश्र और सारंगी पर संदीप मिश्र ने संगत किया। अंत में दिल्ली के पं. हरीश तिवारी ने राग भटियार में ख्याल गायकी और भजन गाकर अपने गायन को विराम दिया। तबले पर पं. मिथिवलेश झा और संवादिनी पर पं. विनय मिश्र ने संगत की।
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