बीएचयू: दानकर्ताओं में टॉप पर बिड़ला परिवार, महामना ने 120 साल पहले जोड़ा था संबंध; स्थापना में मिली थी मदद
बीएचयू के दानकर्ताओं में बिड़ला परिवार का नाम सबसे ऊपर है। महामना मदन मोहन मालवीय ने करीब 120 साल पहले इस परिवार से संबंध जोड़ा था। विश्वविद्यालय की स्थापना के समय परिवार ने 8.36 लाख रुपये दान दिए थे। परिसर में विश्वनाथ मंदिर, लिंबडी और बिड़ला हॉस्टल का निर्माण कराया। 22 साल बाद कुमार मंगलम बिड़ला दीक्षांत समारोह में बीएचयू आएंगे।
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आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह में शनिवार को आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम मुख्य अतिथि होंगे। बीएचयू और बिड़ला के बीच दान-पुण्य का रिश्ता 120 साल पुराना है। विश्वविद्यालय की स्थापना से भी करीब 10 साल पहले का संबंध है और इसकी शुरुआत महामना ने ही की थी।
भारत के सबसे ऊंचे शिखर वाला बीएचयू का विश्वनाथ मंदिर और इसी कैंपस में पूर्वांचल का सबसे बड़ा हॉस्टल बिड़ला परिवार की ही देन है। बीएचयू की स्थापना के लिए शुरुआती दिनों में ही 8.36 लाख रुपये देकर बिड़ला परिवार ही दानकर्ताओं की सूची में शीर्ष पर रहा। आगे चलकर बीएचयू ने भी इस दान का मान रखा और बिड़ला परिवार के तीन सदस्यों को डी. लिट की मानद उपाधि से नवाजा।
इनमें से एक सम्मान तो खुद महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने कुलपति रहते हुए दिया था। बीएचयू में 22 साल बाद दीक्षांत समारोह में दोबारा शिरकत करने आ रहे कुमार मंगलम बिड़ला पूरे कैंपस का भ्रमण कर अपने पुरखों की विरासत को महसूस करेंगे।
उनके परदादा घनश्याम दास और चार पीढ़ी पहले के राजा बलदेव दास के महामना के साथ मजबूत संबंधों और उनके निर्माण को परखेंगे। कुलपति सहित कई अधिकारी साथ चलेंगे। उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया है।
1936 में प्रकाशित किताब में है दान का जिक्र
बीएचयू में बिड़ला के योगदान का बड़ा जिक्र 1936 में प्रकाशित एक पुस्तक में है। बीएचयू के पूर्व कोर्ट सदस्य वी सुंदरम की किताब बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी किताब के अनुसार, विश्वविद्यालय स्थापना के दानकर्ताओं की सूची में बिड़ला परिवार का नाम सबसे ऊपर है।
आज से करीब 120 साल पहले इन्होंने कुल आठ लाख 36 हजार 700 सौ रुपये विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दान किए थे। बलदेव दास बिड़ला और उनके चारों पुत्र सेठ जुगल किशोर, सेठ रामेश्वर दास, घनश्याम दास बिड़ला और बृज मोहन बिड़ला का नाम दानकर्ताओं में है। इसी किताब के मुख्य पृष्ठ पर बीएचयू के विश्वनाथ मंदिर के प्रस्ताव का एक रेखाचित्र भी प्रकाशित है।
इतिहास विभाग और आर्काइव प्रमुख प्रो. ध्रुव कुमार सिंह ने बताया कि बिड़ला परिवार ने 77 मीटर ऊंचा विश्वनाथ मंदिर और बिड़ला हॉस्टल के साथ ही इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए लिंबडी हॉस्टल भी बनवाया था। महामना के गुजरने के बाद घनश्याम दास बिड़ला ने मंदिर का कार्य पूरा कराया और 1966 में इसे पूरी तरह से लोगों के लिए खोल दिया गया।
2004, 1967 और 1936 में बीएचयू से बिड़ला को मिली डी. लिट उपाधि
बीएचयू के पूर्व विशेष कार्याधिकारी डॉ. विश्वनाथ पांडेय ने बताया कि बीएचयू ने बिड़ला परिवार के तीन सदस्यों को डी. लिट की उपाधि दी है। 12 सितंबर 2004 को बीएचयू के तत्कालीन कुलपति प्रो. रामा चंद्ररॉव ने 86वें दीक्षांत में कुमार मंगलम को ऑनरेरी कॉजा डी. लिट की उपाधि से नवाजा था। सम्मानित करने का निर्णय बीएचयू की एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने लिया था। उनके पुरखे राजा बलदेव दास बिड़ला को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने 1937 में ही डी. लिट की उपाधि दी थी, जबकि 1967 में उनके बेटे घन श्याम दास बिड़ला को भी यही उपाधि दी गई।
निबंध प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत
काशी विद्यापीठ में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को कुलपति प्रो.आनंद कुमार त्यागी ने पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि जीवन में कर्तव्यों का सही निर्वहन न करने से ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में सत्यनिष्ठा के साथ जीवन में काम करते रहने की जरूरत है।
पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय स्तर पर कहीं भ्रष्टाचार दिखे या किसी प्रकार का भेदभाव हो तो उसकी सूचना विश्वविद्यालय सक्षम अधिकारी को देनी चाहिए। साथ ही अपने जीवन में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार न होने दे एवं इसका विरोध करें। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक राजकुमार ने विद्यार्थियों को सत्यनिष्ठा के शपथ को याद दिलाते हुए उसका अनुपालन करने का संदेश दिया।