Varanasi News: काशी के इन कलाकारों को सम्मानित करेगी संगीत नाटक अकादमी, गायन और वादन को मिली सराहना
Varanasi News: काशी के लोकगायक भरत शर्मा व्यास और आजमगढ़ के तबला वादक कालीनाथ मिश्रा भी को भी अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा। अमर उजाला से बातचीत में कलाकारों ने कहा कि ये काशी की संगीत साधना का सम्मान है। कहा कि देश ही नहीं बनारस घराने की खुशबू विदेशों तक फैल रही है।
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संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की ओर से पुरस्कार पाने वालों में काशी के संगीत साधकों ने भी अपना नाम दर्ज कराया है। गायन और वादन की श्रेणी में तीन पुरस्कार काशी के नाम आए हैं। हारमोनियम में पंडित धर्मनाथ मिश्र को वर्ष 2022 का अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार, सारंगी वादक संगीत मिश्रा को मिलेगा।
इसके अलावा काशी के लोकगायक भरत शर्मा व्यास और आजमगढ़ के तबला वादक कालीनाथ मिश्रा भी को भी अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा। अमर उजाला से बातचीत में कलाकारों ने कहा कि ये काशी की संगीत साधना का सम्मान है। कहा कि देश ही नहीं बनारस घराने की खुशबू विदेशों तक फैल रही है।
बड़े पिताजी ने पांच साल में ही पकड़ाया हारमोनियम
संगीत नाटक अकादमी का यह सम्मान काशी की संगीत परंपरा और काशीवासियों का सम्मान है। संगीत के प्रति मेरा लगाव पांच साल की अवस्था से ही शुरू हो गया। बड़े पिताजी पंडित स्व. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने हारमोनियम बजाना सीखाया। इसके बाद स्व. बड़े रामदास जी मिश्र, पंडित गणेश प्रसाद जैसे गुरुजनों से बहुत कुछ सीखने को मिला। भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी, संगीत मार्तंड पंडित जसराज, स्व. गिरिजा देवी जैसे कई दिग्गज कलाकारों के साथ मंच साझा करने का मौका मिला। वर्तमान में लोकगायिका मालिनी अवस्थी सहित अन्य नामचीन कलाकारों के साथ भी प्रस्तुतियों में संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रहा हूं। - पंडित धर्मनाथ मिश्रा, हारमोनियम
घर में हर समय गूंजती हैं सारंगी की धुन
संगीत नाटक अकादमी का बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार मिलना मेरे जीवन की बड़ी उपलब्धि है। यू कहें तो सभी बड़ों, संगीत प्रेमियों का आशीर्वाद और बाबा विश्वनाथ की कृपा मिली है। घर में हर समय सारंगी की गूंज सुनाई देती है। जहां तक बनारस घराने की बात करें तो इस घराने से निकली संगीत की खुशबू दुनिया भर में फैलती जा रही है। आठ पुश्तों से सारंगी की साधना चल रही है। पिताजी स्व. संतोष मिश्रा से गुरु के रूप में सारंगी वादन की बारीकियों को सीखने का मौका मिला। उस्ताद जाकिर हुसैन, विदूषी गिरिजा देवी के साथ ही, सुरेश वाडेकर सहित कई महान कलाकारों के साथ मंच साझा किया। - संगीत मिश्रा, सारंगी वादक
लोकगायन को मिला अकादमी का सम्मान
संगीत की विधाओं में लोक गायिकी का अपना अलग ही अंदाज है। राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी ने पुरस्कार देकर इस विधा का मान बढ़ाया है। इस तरह के पुरस्कारों से कलाकारों का सम्मान बढ़ता है। कला के क्षेत्र में समर्पित भाव से साधना करते रहने की प्रेरणा भी मिलती है। देश में कई प्रमुख मंचों के साथ ही विदेश में भी अपनी भोजपुरी की खुशबू बिखेरने का सौभाग्य मिला है। भोजपुरी सम्राटए भोजपुरी रत्न के साथ ही भोजपुरी विश्व पितामह जैसे अवार्ड के बाद अब संगीत नाटक अकादमी के अवार्ड ने संगीत की साधना को बढ़ाने का आत्मबल दिया है। - भरत शर्मा व्यास, गायन।
बचपन में ही तबले पर रख दी उंगली
संगीत की साधना बचपन से ही चल रही है। साढ़े चार साल की उम्र में ही मेरे पिताजी गुरु आचार्य पंडित राखाल मिश्र के निर्देशन में तबला सीखना शुरू किया। उनके बाद बड़े भाई पंडित शंभूनाथ मिश्र और फिर पंडित मदन मिश्र से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। तबला सम्राट पंडित किशन महाराज के साथ भी करीब 21 साल मंच पर प्रस्तुति देने का मौका मिला। पिछले 10.12 साल से बेटे सत्यप्रकाश के साथ जुगलबंदी करने की भी अपनी अलग खुशी है। - पंडित कालीनाथ मिश्रा, तबला