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संसाधन के अभाव में हौसलों की उड़ान से आगे बढ़ रहे संदीप
Fri, 22 Nov 2019 10:07 AM IST
गीतार्जुन गौतम
मोनू मिश्रा, अमर उजाला, भदोही
मोनू मिश्रा, अमर उजाला, भदोही
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Fri, 22 Nov 2019 10:07 AM IST
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एथलीट संदीप
- फोटो : a
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कहते हैं कि अगर कुछ करने का जज्बा हो तो मुश्किलें छोटी लगने लगती हैं। घोरहा गांव निवासी संदीप इसी प्रवृत्ति की बानगी हैं। वह गरीबी से जूझकर खेल की दुनिया में जगह बनाने में जुटे हैं। उधार के जूते लेकर दौड़ के कई मुकाबलों में जीत दर्ज कर चुके हैं। सूबे के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार में 500 मीटर, एक किमी, दो, तीन, पांच, आठ और 10 किमी के दौड़ में प्रथम और दूसरा स्थान प्राप्त कर चुके हैं।
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भदोही जिले के ज्ञानपुर विकास खंड के घोरहा गांव निवासी हेमजराज बिंद काव् होनहार बेटा संदीप कुमार बिंद 1।2वीं का छात्र है। ज्ञानपुर में आयोजित होने वाली बाबा हरिहर नजाथ क्रॉस कंट्री रेस में अर्जित सफलता के जरिए अपनी प्रतिभा की दास्तां लिखना शुरू किया तो एक के बाद एक सफलताएं हासिल करता गया।
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कई प्रतियोगिताओं में सफलता के झंडे गाड़ते हुए उन्होंने अब तक सौ से अधिक प्रमाण पत्र अर्जित कर लिया है। बिहार के आरा में आयोजित राज्य स्तरीय दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम जबकि मध्यप्रदेश के भोपाल की प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त कर संदीप ने जिले का मान बढ़ाया। 100 से अधिक प्रमाण पत्र संदीप की सफलता के गवाही बयां करते हैं।
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बावजूद इसके संदीप को आगे ले जाने के लिए न तो प्रशासन ने पहल की और न ही कोई संस्था आगे आई। गरीबी से संघर्ष करते हुए मुकाम बनाने में जुटा यह धावक गरीबी से जूझ रहा है। किसी भी राज्य, मंडल स्तरीय दौड़ में जाने से पहले उसे साथियों से जूते भी उधार लेने पड़ते हैं। संदीप के पिता हेमराज के पास महज दो विस्वा जमीन है।
परिवार का जीविकोपार्जन करने के लिए दूसरे के खेत को अधिया पर लेकर खेती कर जीविकोपार्जन करते हैं। देश भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे संदीप के लिए अब मिलने वाले प्रमाणपत्र सिर्फ कागजा का टुकड़ा ही लग रहे हैं।