वाराणसी: गंगा पार करीब 12 करोड़ से बनाई गई रेत पर बनी नहर बाढ़ में गायब, प्रशासन का दावा- कोई नुकसान नहीं
वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा कि कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि करीबन 11 करोड़ का प्रोजेक्ट था जो यूपीपीसीएल द्वारा कराया जा रहा था। प्रोजेक्ट का पूरा पेमेंट नहीं हुआ है क्योंकि प्रोजेक्ट विभाग को हस्तांतरित नहीं हुआ था।
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वाराणसी में गंगा पार रेती पर 1195 लाख रुपये की लागत से बनी नहर बाढ़ में समा चुकी है। नदी विशेषज्ञों ने जहां पूरे प्रोजेक्ट पर ही सवालिया निशान खड़ा करते हुए इसे पैसे की बर्बादी बताया है, वहीं जिला प्रशासन का दावा है कि कोई नुकसान नहीं हुआ है। जिलाधिकारी का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
गंगा पार रेती में 1195 लाख रुपये की लागत से 5.3 किमी लंबी और 45 मीटर चौड़ी नहर बनाई गई थी। रामनगर से राजघाट तक बनी नहर को बाईपास करने वाला यह प्रोजेक्ट इस साल मार्च में शुरू हुआ। साथ ही बाढ़ के आने के पहले लगभग पूरा हो चुका था।
जिला प्रशासन ने दावा किया था कि नहर बन जाने से गंगा के पक्के घाटों पर पानी का दबाव कम होगा और पक्के घाटों का क्षरण भी रुकेगा। आईआईटी बीएचयू के प्रो. विशंभरनाथ मिश्रा ने बताया कि गंगा उस पार की रेत गंगा का ही हिस्सा है और बाढ़ में हमेशा डूब जाता है। गंगा का यह गुण है कि वह एक तरफ मिट्टी और दूसरी तरफ रेत छोड़ती है। बिना किसी अध्ययन के गंगा उस पार नहर बनाने का कोई औचित्य समझ में नहीं आता है। दावा किया गया था कि नहर बनने से पक्के घाटों पर दबाव कम होगा और कटान भी रुकेगा।
आईआईटी बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर व नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी ने बताया कि नहर बनने से बनारस में गंगा के घाट छोड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। तकनीकी रूप से प्रोजेक्ट सही नहीं है। बाढ़ में पूरी नहर गायब हो गई है। प्राकृतिक नदी के बहाव को कभी भी छेड़ना नहीं चाहिए। बिना स्टडी किए गंगा में नहर बना दी गई और उसका खामियाजा आने वाले वर्षों में भुगतना होगा।
नहर से निकाली गई बालू से सरकार को मिले तीन करोड़
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा का दावा है कि कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में गंगा नदी को ड्रेजिंग करने के करीबन 11.95 करोड़ का प्रोजेक्ट था जो यूपीपीसीएल द्वारा कराया जा रहा था। प्रोजेक्ट का पूरा पेमेंट नहीं हुआ है। प्रोजेक्ट विभाग को हस्तांतरित नहीं हुआ था। बनारस में और भी कई प्रोजेक्ट डूबे हैं।
ड्रेजिंग के जरिये नहर से निकाली गई बालू को नीलाम करके पहले ही सरकार को तीन करोड़ रुपये मिल चुके हैं। अभी कांट्रेक्टर की लायबिलिटी में ही यह प्रोजेक्ट है। जैसे ही गंगा का पानी उतरेगा वैसे नहर से बालू निकालकर दुबारा आकार में लाया जाएगा और प्रोजेक्ट पूरा होने पर ही पेमेंट होगा और हस्तांतरण होगा।